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केंद्र सरकार की तरफ से राजस्व घाटा अनुदान (आडीजी) बंद किए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार गहरे वित्तीय संकट से जूझ रही है। राज्य के खजाने पर पड़ रहे भारी दबाव के बीच प्रदेश सरकार ने एक बार फिर 700 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने का फैसला किया है। इससे पहले राज्य सरकार ने पिछले महीने यानी जून में भी 700 करोड़ रुपए का ही कर्ज लिया था।
13 वर्ष बाद ब्याज सहित लौटानी होगी राशि
वित्त विभाग की ओर से 700 करोड़ रुपए का यह नया कर्ज लेने के लिए सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार 7 जुलाई को इस ऋण के लिए नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके अगले दिन यानी 8 जुलाई को यह धनराशि राज्य सरकार के खाते में जमा हो जाएगी। शर्तों के मुताबिक सरकार को कर्ज की यह रकम 13 वर्ष बाद ब्याज सहित लौटानी होगी। इसकी अदायगी की तारीख 8 जुलाई, 2039 तय की गई है। लगातार लिए जा रहे कर्ज के कारण प्रदेश का आर्थिक ढांचा गंभीर दबाव में है। इस नए कर्ज के जुड़ने के साथ ही राज्य सरकार पर कुल कर्ज का आंकड़ा 1,11,900 करोड़ रुपए के पार पहुंच चुका है।
खजाने पर भारी दबाव, हर महीने चाहिए करोड़ों रुपए
राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती हर महीने अनिवार्य रूप से की जाने वाली अदायगियों की है। सरकारी खजाने से हर महीने इन खर्चों के लिए भारी-भरकम राशि की आवश्यकता होती है। प्रतिबद्ध देनदारियां के लिए हर महीने 2,800 करोड़ रुपए की जरूरत होती है। इसमें कर्मचारियों के वेतन के लिए 2,000 करोड़ रुपए और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेैंशन के लिए 800 करोड़ रुपए शामिल हैं। इसके अलावा पहले लिए गए कर्ज के ब्याज की अदायगी के लिए 500 करोड़ रुपए और कुल कर्ज का मूलधन चुकाने के लिए 300 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आवश्यकता हर महीने रहती है।
कर्ज के सहारे चल रहा खर्च
प्रदेश सरकार के पास आय के संसाधन सीमित हैं और खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं। राजस्व घाटा अनुदान रुकने, वेतन-पैंशन के भारी भरकम बिल और पुराने कर्ज की किस्तें चुकाने के दबाव के चलते राज्य सरकार के पास नियमित अंतराल पर नया कर्ज लेने के अलावा फिलहाल कोई और विकल्प नजर नहीं आ रहा है।










