सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल पर कोर्ट की अहम टिप्पणी, वैवाहिक विवाद में मानसिक क्रूरता के पहलू पर फैसला
#बैजनाथ। पति-पत्नी के वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में अदालत ने सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल, वैवाहिक जिम्मेदारियों से दूरी और लगातार अपमानजनक व्यवहार को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
मामले के अनुसार, बैजनाथ उपमंडल निवासी पति ने वर्ष 2024 में पारिवारिक न्यायालय में तलाक की याचिका दायर की थी। पति का आरोप था कि मार्च 2017 से पत्नी के व्यवहार में बदलाव आने लगा और वह लंबे समय तक सोशल मीडिया पर व्यस्त रहने लगी। आरोप यह भी था कि पत्नी ससुराल में रहने और घरेलू जिम्मेदारियां निभाने से इन्कार करती थी तथा परिवार के सदस्यों व रिश्तेदारों के साथ दुर्व्यवहार करती थी।
पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी उसे अनाकर्षक और कमतर बताकर लगातार अपमानित करती थी। परिवार और पंचायत स्तर पर रिश्ते को बचाने के लिए समझौते के प्रयास भी किए गए, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
नोटिस के बावजूद कोर्ट में पेश नहीं हुई पत्नी
सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से पत्नी को नोटिस जारी किए गए, लेकिन वह अदालत में उपस्थित नहीं हुई। इसके बाद अदालत ने उसे एकतरफा घोषित करते हुए उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई।
घरेलू काम से इन्कार पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल खाना बनाने या कपड़े धोने जैसे घरेलू काम करने से इन्कार करना अपने आप में मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। हालांकि, यदि ऐसा व्यवहार विवाह संबंध जारी न रखने की मंशा, लगातार विवाद, परिवार के प्रति अनादर और जीवनसाथी के अपमान जैसे अन्य परिस्थितियों के साथ सामने आए तथा आरोपों का प्रभावी खंडन भी न किया जाए, तो पूरे मामले की परिस्थितियों के आधार पर इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है।
इस फैसले ने वैवाहिक जीवन में सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल, पारिवारिक जिम्मेदारियों और पति-पत्नी के आपसी व्यवहार के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी पहलू सामने रखा है।











