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त्योहारी सीजन की दस्तक के बीच चीनी की बढ़ती कीमतों ने अब हिमाचल की सियासत को भी गर्म कर दिया है. रसोई में चाय की मिठास से लेकर मिठाई की दुकानों और बड़े उद्योगों तक इस्तेमाल होने वाली चीनी के दामों में उछाल को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा है. हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने चीनी के बढ़ते दामों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने दावा किया कि चीनी की कीमत अभी थोक बाजार में करीब 66 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है और आने वाले दिनों में इसके 90 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने का अनुमान है. मंत्री ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर आम आदमी की रसोई और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ेगा.
मंत्री ने पूछा क्यों बढ़ रहे चीनी के दाम ?
अनिरुद्ध सिंह ने कहा, “देश में पिछले कई वर्षों से गन्ने की कमी की बात सामने नहीं आई है. देश में पर्याप्त मात्रा में गन्ने का उत्पादन हो रहा है, इसके बावजूद चीनी के दाम लगातार बढ़ना गंभीर सवाल खड़ा करता है. केंद्र सरकार को इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि आखिर जब देश में गन्ने की कमी नहीं है तो चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं”.
मंत्री ने चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे गन्ने को एथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट किए जाने को प्रमुख कारण बताया. उन्होंने कहा कि पेट्रोल में मिलाए जाने वाले एथेनॉल के लिए अधिक से अधिक गन्ना डायवर्ट किया जा रहा है. इसके चलते चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने पर असर पड़ रहा है और देश में चीनी का संकट पैदा होने की स्थिति बन रही है. उन्होंने कहा कि एथेनॉल के उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति पर केंद्र सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए.
अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि किसी एक व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसी नीति नहीं बनाई जानी चाहिए, जिसका खामियाजा पूरे देश की जनता को महंगाई के रूप में भुगतना पड़े. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पूरे देश का गन्ना एथेनॉल में इस्तेमाल किया जाएगा और चीनी के दाम लगातार बढ़ेंगे तो इसका सबसे ज्यादा असर आम परिवारों पर पड़ेगा.
मंत्री ने कहा कि पिछले पांच से दस वर्षों में रोजमर्रा की जरूरत की लगभग हर वस्तु के दाम करीब दोगुने हो चुके हैं. ऐसे में चीनी जैसी आवश्यक खाद्य वस्तु की कीमतों में और बढ़ोतरी आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा सकती है. उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि एथेनॉल नीति और चीनी की कीमतों के बीच संतुलन बनाया जाए, ताकि आम जनता को अनावश्यक महंगाई का सामना न करना पड़े.
घरेलू बजट पर पड़ेगा बोझ
आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा ने कहा, “महंगाई की यह मार गरीब और मध्यम वर्ग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि छोटे कारोबारियों, होटल संचालकों और मिठाई कारोबार से जुड़े लोगों की लागत भी बढ़ा रही है. आने वाले समय में दिवाली समेत कई बड़े त्योहार हैं, जब लोग एक-दूसरे को मिठाइयां बांटते हैं, ऐसे में चीनी के बढ़े दाम आम लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डालेंगे. भाजपा केंद्र की सत्ता में है और लगातार हर वर्ग के विकास का दावा करती है, लेकिन चीनी के आसमान छूते दाम इस दावे पर सवाल खड़े करते हैं”.
उन्होंने कहा कि चीनी ऐसी आवश्यक वस्तु है, जिसका इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है. इसके अलावा होटल, मिठाई की दुकानें और विभिन्न छोटे-बड़े कारोबार भी चीनी की कीमतों से सीधे प्रभावित होते हैं. आयुष मंत्री ने चीनी की बढ़ती कीमतों को एथेनॉल उत्पादन से भी जोड़ते हुए कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के चलते चीनी की बड़ी मात्रा एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बेटे की कंपनी में भी एथेनॉल उत्पादन को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चाएं सामने आती रही हैं.
गोमा ने दावा किया कि एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल का असर बाजार में इसकी उपलब्धता और कीमतों पर पड़ रहा है. गोमा ने कहा कि केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि चीनी के दाम लगातार क्यों बढ़ रहे हैं और इसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर क्यों पड़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी नीति का लाभ कुछ चुनिंदा लोगों को मिल रहा है और उसकी कीमत गरीब, मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों को चुकानी पड़ रही है, तो यह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है?









