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Himachal: मरीज के पेट में छूटा स्पंज, एक साल बाद खुला राज- अब पांच लाख मुआवजा देंगे डॉक्टर

Khabron wala 

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में एक व्यक्ति को पित्ताशय की पथरी का ऑपरेशन करवाना महंगा पड़ गया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों से मरीज के पेट में सर्जिकल स्पंज छूट गया- जिसके कारण उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसी मामले में अब जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अपना फैसला सुनाया है।

डॉक्टरों को लगा भारी जुर्माना

आयोग ने बद्दी स्थित मल्होत्रा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के चिकित्सकों को पीड़ित को मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही शिकायत दर्ज किए जाने की तारीख से मुआवजे की राशि का भुगतान होने तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। आयोग ने शिकायतकर्ता को 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का भी निर्देश दिया है। यह फैसला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा और सदस्य नारायण ठाकुर ने सुनाया।

मामला वर्ष 2019 का है। डलहौजी क्षेत्र के निवासी राकेश कुमार को पेट में तेज दर्द की शिकायत के बाद बद्दी स्थित मल्होत्रा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। चिकित्सकीय जांच में उनके पित्ताशय में पथरी होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद अस्पताल में उनका ऑपरेशन किया गया और उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई।

कब हुआ मरीज को दर्द?

ऑपरेशन के बाद राकेश कुमार अपने सामान्य जीवन में लौट गए। मगर करीब एक साल बाद उन्हें दोबारा पेट में दर्द की समस्या होने लगी। परेशानी बढ़ने पर उन्होंने अस्पताल में जांच करवाई। वहां अल्ट्रासाउंड और रक्त की जांच कराई गई। शुरुआती तौर पर उनकी समस्या को सामान्य गैस्ट्रिक परेशानी से जोड़कर देखा गया।

लगातार परेशानी रहने के कारण राकेश कुमार ने पठानकोट में भी अल्ट्रासाउंड करवाया। इस जांच में पेट के भीतर ऐसी वस्तु होने की आशंका जताई गई- जो पिछली सर्जरी के दौरान शरीर में रह गई हो सकती थी।

पेट में क्या मिला?

इसके बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया और आगे की जांच में ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले सर्जिकल स्पंज के पेट में छूटे होने की आशंका सामने आई। राकेश कुमार इसके बाद पंचकुला स्थित एक अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने उनकी स्थिति की जांच करने के बाद दोबारा ऑपरेशन करने का फैसला लिया।

पंचकुला के अस्पताल में राकेश कुमार का दोबारा ऑपरेशन किया गया। इस दौरान उनके पेट में मौजूद सर्जिकल स्पंज को बाहर निकाला गया। इस उपचार के बाद मरीज ने मामले को चिकित्सकीय लापरवाही से जोड़ते हुए उपभोक्ता आयोग का रुख किया।

कब से था पेट में स्पंज?

मामले की सुनवाई के दौरान पंचकुला के अस्पताल में उपचार करने वाले चिकित्सक डा. कुलदीप धवन का बयान भी आयोग के समक्ष दर्ज हुआ। उन्होंने बताया कि पिछली सर्जरी के दौरान सर्जिकल स्पंज मरीज के पेट में रह गया था। आयोग के समक्ष पेश किए गए चिकित्सा रिकॉर्ड और बयान मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण रहे।

शिकायत पर सुनवाई के दौरान आयोग ने मामले से जुड़े चिकित्सा दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। आयोग ने चिकित्सकीय लापरवाही के संबंध में चार प्रमुख आधारों को ध्यान में रखते हुए रिकॉर्ड की जांच की।

मरीज की देखभाल डॉक्टरों की जिम्मेदारी

आयोग के अनुसार, अस्पताल और उपचार करने वाले चिकित्सकों की जिम्मेदारी थी कि ऑपरेशन के दौरान मरीज की उचित देखभाल सुनिश्चित की जाए। सर्जिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस्तेमाल की गई सामग्री का हिसाब रखना भी उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मरीज के शरीर के भीतर सर्जिकल स्पंज का रह जाना इस निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया से विचलन माना गया।

आयोग ने यह भी माना कि इस घटना के कारण राकेश कुमार को आगे चलकर दोबारा उपचार और ऑपरेशन करवाना पड़ा, जिससे उन्हें अतिरिक्त शारीरिक परेशानी और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।

पीड़ित ने कितना मांगा था मुआवजा?

राकेश कुमार ने इलाज में हुए खर्च और अन्य नुकसान के एवज में 6,52,026 रुपये की मांग की थी। इसके अतिरिक्त उन्होंने मानसिक पीड़ा और शारीरिक कष्ट के लिए तीन लाख रुपये मुआवजे के तौर पर मांगे थे। इस तरह शिकायत में कुल 9,52,026 रुपये की राशि की मांग की गई थी।

आयोग ने मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और परिस्थितियों का आकलन करने के बाद अस्पताल के चिकित्सकों को 5,12,026 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके साथ शिकायत दर्ज होने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में अदा करने के निर्देश भी दिए गए।

मरीज को क्या-क्या हुई परेशानी?

मामले में शिकायतकर्ता की मुख्य परेशानी यह रही कि-

पहली सर्जरी के करीब एक वर्ष बाद उन्हें दोबारा पेट दर्द की शिकायत शुरू हुई।

शुरुआत में समस्या को सामान्य गैस्ट्रिक परेशानी माना गया।

दूसरी जगह कराई गई जांच में पेट के भीतर सर्जरी के दौरान छूटी वस्तु होने की आशंका सामने आई।

दोबारा अस्पताल में भर्ती होना पड़ा

ऑपरेशन के जरिए सर्जिकल स्पंज निकालना पड़ा

सिलसिलेवार पढ़ें पूरी खबर

2019 में डलहौजी निवासी राकेश कुमार को पेट में तेज दर्द के बाद बद्दी के मल्होत्रा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था- जहां पित्ताशय की पथरी का ऑपरेशन किया गया।

ऑपरेशन के दौरान सर्जिकल स्पंज पेट के अंदर ही छूट गया। मगर मरीज को इसकी जानकारी नहीं हुई और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

करीब एक साल बाद दोबारा पेट दर्द होने लगा। शुरुआती जांच में इसे सामान्य गैस्ट्रिक समस्या माना गया। मगर पठानकोट में कराए अल्ट्रासाउंड से पेट में किसी बाहरी वस्तु के मौजूद होने की आशंका सामने आई।

राकेश कुमार पंचकुला के अस्पताल पहुंचे- जहां दोबारा ऑपरेशन कर पेट के अंदर फंसा सर्जिकल स्पंज निकाला गया। चिकित्सक डा. कुलदीप धवन ने भी आयोग के समक्ष इसकी पुष्टि की।

मामले की सुनवाई में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इसे चिकित्सकीय लापरवाही माना और अस्पताल के चिकित्सकों को जिम्मेदार ठहराया।

आयोग ने पीड़ित को 5,12,026 रुपये मुआवजा, शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया।

राकेश कुमार ने इलाज और अन्य नुकसान के लिए 6,52,026 रुपये तथा मानसिक पीड़ा और शारीरिक कष्ट के लिए 3 लाख रुपये समेत कुल 9,52,026 रुपये की मांग की थी।

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