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नाहन : स्वागत द्वार की मरम्मत को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसा में बदला , पत्थरबाजी में थाना प्रभारी कुलबीर सिंह समेत कई पुलिसकर्मियों के घायल

 

सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन के वाल्मीकि चौक पर शुक्रवार को दो समुदायों के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। दोनों ओर से जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसमें सदर थाना प्रभारी कुलबीर सिंह समेत कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना है। एक पुलिस जवान की टांग में भी गंभीर चोट आई। हिंसा के दौरान कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए, जबकि वाल्मीकि जी के स्मारक को नुकसान पहुंचाए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया।

जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत वाल्मीकि चौक पर टूट चुके स्वागत द्वार की मरम्मत को लेकर हुई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ती गई और हालात बेकाबू हो गए। दोनों ओर से पत्थर बरसने लगे। इस दौरान कुछ लोगों ने दोनों पक्षों को शांत करने का प्रयास भी किया, लेकिन हिंसा पर तत्काल काबू नहीं पाया जा सका। घटनास्थल पर महिला पुलिसकर्मियों सहित पुलिस बल मौजूद रहा, मगर पुलिसकर्मियों को भी पत्थरबाजी का सामना करना पड़ा।

रिजर्व फोर्स की तैनाती में देरी पर सवाल

इस घटनाक्रम ने पुलिस व्यवस्था और प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुआ और दोपहर 2 बजे तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शुरुआती दौर में ही हालात बिगड़ने लगे थे, तो अतिरिक्त पुलिस बल समय रहते क्यों नहीं पहुंचा? जिला सिरमौर के नजदीक आईआरबी की छठी बटालियन होने के बावजूद रिजर्व फोर्स की तैनाती में देरी क्यों हुई? हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।

मौके पर डीएसपी शक्ति सिंह और सदर थाना प्रभारी कुलबीर सिंह सहित पुलिस बल स्थिति संभालने में जुटा रहा। थाना प्रभारी के सिर पर चोट लगने की सूचना है। पुलिसकर्मियों के घायल होने के बीच पर्याप्त सुरक्षा बल और संसाधनों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

नेशनल हाईवे-907ए पर यातायात प्रभावित, मरीजों की आवाजाही को लेकर चिंता

हिंसक झड़प का असर शहर की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा। नाहन से गुजरने वाले नेशनल हाईवे-907ए पर दोपहर करीब 12 बजे से 2 बजे तक यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। शिमला और चंडीगढ़ की ओर जाने वाले मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी।

नाहन में मेडिकल कॉलेज होने के कारण इस स्थिति ने आपातकालीन सेवाओं को लेकर भी चिंता पैदा की। सवाल है कि यदि इसी दौरान किसी गंभीर मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़ती, तो एंबुलेंस की निर्बाध आवाजाही कैसे सुनिश्चित की जाती? यातायात बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक मार्गों और आपात सेवाओं के प्रबंधन को लेकर प्रशासन की तैयारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

स्मारक को नुकसान के बाद बढ़ा तनाव

घटनाक्रम के दौरान वाल्मीकि जी के स्मारक को नुकसान पहुंचाए जाने की सूचना सामने आई, जिसके बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया। पत्थरबाजी में कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए। एक निजी वाहन के घटनास्थल से निकलने की कोशिश के दौरान उस पर भी पत्थर बरसाए जाने की सूचना है। आग बुझाने वाली गाड़ी को भी मौके पर बुलाया गया, लेकिन स्थिति को नियंत्रित करने में समय लगा।

दोनों समुदायों के कुछ जिम्मेदार लोगों ने अपने-अपने पक्ष के लोगों को रोकने और शांति बनाए रखने की कोशिश की। ऐसे में पूरे समुदाय को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय घटना में शामिल व्यक्तियों की पहचान और उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

मौके पर एसडीएम नाहन भी पहुंचे। हालांकि, रिजर्व फोर्स की तैनाती, यातायात प्रबंधन और हालात नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

प्रशासन की जवाबदेही तय होना जरूरी

नाहन की इस घटना ने कानून-व्यवस्था से जुड़े कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद शुरू होते ही अतिरिक्त पुलिस बल क्यों नहीं पहुंचा? राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित होने के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था क्या थी? मेडिकल कॉलेज वाले शहर में आपात सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए? इन सवालों पर प्रशासन का पक्ष सामने आना जरूरी है।

फिलहाल प्राथमिकता शहर में शांति बहाल करने, घायलों को उचित उपचार उपलब्ध कराने और किसी भी तरह की अफवाह या तनाव को फैलने से रोकने की है। साथ ही, पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर हिंसा में शामिल लोगों की पहचान और पुलिस बल की तैनाती में हुई देरी के कारणों को स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा होने पर नाहन को घंटों तक हिंसा और यातायात ठप होने का सामना न करना पड़े।

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