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हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी स्कूल में छात्रा के साथ कथित जातिगत भेदभाव किए जाने और उसे जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि छात्रा ने स्कूल के शौचालय की टाइलें साफ करने से इनकार किया तो वहां तैनात मल्टी टास्क वर्कर ने कथित तौर पर उसके साथ जातिगत टिप्पणी की।
शिक्षा के मंदिर में इस तरह के आरोप सामने आने के बाद न केवल पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल है, बल्कि शिक्षा विभाग में भी हड़कंप मच गया है। मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब छात्रा ने अपने साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का वीडियो बनाकर अपनी शिकायत सार्वजनिक कर दी। अब शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मामला चंबा जिले के मैहला शिक्षा खंड के एक सरकारी स्कूल का बताया जा रहा है। सामने आई जानकारी के अनुसार, स्कूल में पढ़ने वाली एक छात्रा को शौचालय की टाइलें साफ करने के लिए कहा गया था। छात्रा ने जब ऐसा करने से इनकार किया तो मामला विवाद में बदल गया। छात्रा का आरोप है कि इस दौरान स्कूल में कार्यरत मल्टी टास्क वर्कर ने उसे जातिसूचक शब्द कहे और अपमानित किया। इस घटना ने स्कूल परिसर में विद्यार्थियों के साथ होने वाले व्यवहार और उनके सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस पूरे मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया जब छात्रा ने एक वीडियो बनाकर अपने साथ हुई कथित घटना को सामने रखा। वीडियो में छात्रा ने जातिगत टिप्पणी और दुर्व्यवहार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। इसके बाद शिक्षा विभाग का ध्यान भी इस ओर गया और स्कूल प्रबंधन को मामले में जवाबदेही तय करने के लिए कदम उठाने पड़े।
नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं, प्रधानाचार्य ने भेजी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल के प्रधानाचार्य ने संबंधित मल्टी टास्क वर्कर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। हालांकि, कर्मचारी की ओर से दिए गए जवाब से प्रधानाचार्य संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद उन्होंने पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट उच्च शिक्षा उपनिदेशक को भेज दी। प्रधानाचार्य ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि संबंधित कर्मचारी ने अपने जवाब में घटनाक्रम रविवार का बताया है, जबकि रविवार को स्कूल में अवकाश रहता है। इसके अलावा कर्मचारी ने अपनी गलती भी स्वीकार नहीं की है।
उच्च शिक्षा उपनिदेशक विकास महाजन ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रधानाचार्य की रिपोर्ट विभाग को मिल गई है। अब इस प्रकरण की जांच के लिए कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी छात्रा की शिकायत, कर्मचारी के जवाब और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल करेगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि फिलहाल आरोपों की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
शिक्षा के मंदिर में जातिगत भेदभाव ने खड़े किए सवाल
स्कूलों को बच्चों के सुरक्षित भविष्य और समानता की सीख देने वाला स्थान माना जाता है। ऐसे में किसी सरकारी शिक्षण संस्थान में छात्रा के साथ जातिगत भेदभाव और अपमानजनक टिप्पणी के आरोप सामने आना बेहद गंभीर मामला है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल संबंधित कर्मचारी की जवाबदेही का विषय होगा, बल्कि स्कूलों में विद्यार्थियों के सम्मान, सुरक्षा और समान व्यवहार सुनिश्चित करने की व्यवस्था पर भी सवाल उठेंगे। फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर शिक्षा विभाग की जांच पर टिकी है। अब देखना होगा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और आरोपी कर्मचारी के खिलाफ विभाग क्या कार्रवाई करता है।









