पांवटा साहिब : देवभूमि दून पहाड़ी संगठन का की कमान जगदीश तोमर को , आज होगा शपथ समारोह
Khabron wala
पांवटा साहिब पांवटा साहिब की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में लंबे समय से चली आ रही खींचतान पर अब विराम लग गया है। पहाड़ी समाज ने एकजुटता का नया अध्याय लिखते हुए *देवभूमि दून पहाड़ी संगठन* के नाम से एक नए और शक्तिशाली संगठन का ऐलान कर दिया है। सर्वसम्मति से *जगदीश तोमर* को संगठन का नया अध्यक्ष चुना गया है, जबकि चार अन्य अहम पदों पर भी नियुक्तियां की गई हैं।
आज शाम को 4:30 बजे को ज्ञानचंद गोयल धर्मशाला में संगठन की नवगठित कार्यकारणी का शपथ समारोह रखा गया है सभी लोगों को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है
नवनियुक्त अध्यक्ष जगदीश तोमर ने कहा कि यह सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि पहाड़ी भाइयों के स्वाभिमान और संस्कृति का आंदोलन है। संगठन का लक्ष्य बिखरे हुए समाज को एक माला में पिरोना है।
> “हमारा मकसद सिर्फ बैठकें करना नहीं है। हम एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी बनेंगे। गांव की गर्भवती महिलाओं, हमारी बेटियों और हमारे बुजुर्गों की मदद करना हमारी पहली प्राथमिकता होगी। हम अपनी विलुप्त होती पहाड़ी संस्कृति को फिर से ताजा करेंगे,” तोमर ने कहा।
उन्होंने दो टूक कहा कि पांवटा में सक्रिय सभी छोटे-बड़े पहाड़ी संगठनों को भी इस परिवार में जोड़ा जाएगा, ताकि एक विशाल और अटूट पहाड़ी परिवार का निर्माण हो सके। संगठन ने ऐलान किया है कि पांवटा साहिब के हर विकास कार्य में उनकी दखल होगी, ताकि पहाड़ी समाज को किसी भी सरकारी दफ्तर में परेशान न होना पड़े।
*विवाद खत्म, नए युग की शुरुआत*
बताते चलें कि पांवटा में लंबे समय से एक संगठन के नाम पर दो गुटों में विवाद चल रहा था। इस विवाद से समाज में भ्रम की स्थिति थी। अब सभी ने मिलकर इस खींचतान को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है।
फैसला लिया गया है कि पुराना संगठन अपने स्तर पर काम करता रहेगा, लेकिन नया संगठन *देवभूमि दून पहाड़ी संगठन* कहीं बड़े विजन और बड़े स्तर पर काम करेगा।
इस नए संगठन को खड़ा करने में कई बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों का पसीना लगा है। समर्थकों ने कहा, “पहले वाले संगठन को हमने खून-पसीने से सींचा था, लेकिन कुछ मतभेदों के कारण यह नया फैसला लेना पड़ा। अब इस नए संगठन को हम पहले से कई गुना ज्यादा मजबूत और अनुशासित बनाएंगे।”
नई टीम ने साफ कर दिया है कि अब हर गांव से युवाओं, बुजुर्गों और बुद्धिजीवियों को जोड़ा जाएगा और पांवटा साहिब की हर सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधि में देवभूमि दून पहाड़ी संगठन की गूंज सुनाई देगी।










