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नशे के खिलाफ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक कड़ा संदेश दिया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि नशीले पदार्थों की तस्करी के कारण देश की संप्रभुता, अर्थव्यवस्था और सेहत को नुकसान पहुंचता है. ऐसे में नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जा सकती है. इस महत्वपूर्ण और सख्त संदेश के साथ ही हाईकोर्ट ने एक नशा तस्कर की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया.
आरोपी ने याचिका में कहा था कि उसे दो साल का समय जेल में हो चुका है और मामले की जांच ढीली है. ऐसे में उसे जमानत दी जाए. हाईकोर्ट ने इस तर्क को नहीं माना और कहा कि नशे के खिलाफ सख्ती जरूरी है. मामले के अनुसार नशा तस्कर दो साल पहले बस में सवा किलो चरस के साथ पकड़ा गया था. हाईकोर्ट ने न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन शर्मा ने चंबा जिला के रहने वाले सूरज कुमार की जमानत याचिका को खारिज कर दिया.
मामले के अनुसार सरकारी पक्ष ने बताया कि दो साल पहले 6 मार्च को चंबा पुलिस ने एक टीम को गश्त पर तैनात किया था. टीम ने तुनुहट्टी पुलिस चेक पोस्ट पर नाका लगाया हुआ था. सुबह के समय चंबा से पठानकोट जा रही एचआरटीसी की बस को चैकिंग के लिए रोका गया. पुलिस टीम ने सरकारी बस की सीट नंबर 41 पर बैठे आरोपी सूरज कुमार की तलाशी ली. तलाशी के दौरान सूरज के पास मौजूद बैग से 1 किलो 126 ग्राम चरस/कैनबिस बरामद हुई. पुलिस ने मौके की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी सूरज कुमार और उसके दो साथियों के खिलाफ पुलिस स्टेशन चुवाड़ी में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था.
अब आरोपी सूरज कुमार ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी. आरोपी का कहना था कि वह पिछले दो साल से जेल में बंद है और मुकदमा धीमा चल रहा है. ऐसे में उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है. मामले में एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और रिकॉर्ड का अवलोकन किया. अदालत ने रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुकाबले देश का हित सर्वोपरि होता है. एनडीपीएस एक्ट की धारा-37 के तहत जमानत की कड़ी शर्त को केवल लंबे समय तक जेल में रहने के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यह टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी.









