हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में बरसात के दौरान खनन गतिविधियों पर रोक के बावजूद अवैध खनन का कार्य बदस्तूर जारी है। समाजसेवी ने मंगलवार को नाहन में पत्रकार वार्ता कर ये आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिले के लगभग हर माइनिंग क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर खनन किया जा रहा है।
उपायुक्त सिरमौर ने पिछले माह बरसात के मौसम में खनन गतिविधियां बंद रखने के लिए संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद इन आदेशों की कथित तौर पर खुलेआम अवहेलना हो रही है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रशासन ने बरसात के दौरान खनन पर रोक लगा रखी है तो नदियों और खड्डों में मशीनें कैसे चल रही हैं और ब्लास्टिंग गतिविधियां किसकी अनुमति से हो रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि संगड़ाह के अलावा पांवटा साहिब, सतौन और शिलाई क्षेत्रों में गिरि और बाता नदी में भी खनन गतिविधियां जारी हैं। उनका कहना है कि बरसात के दौरान नदियों और खड्डों से बड़े पैमाने पर खनन होने से इनके प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ रहा है। इससे आसपास के घरों और सड़कों के लिए भी खतरा बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बारिश के कारण जिले में पहले ही कई सड़कें बंद हो चुकी हैं और जगह-जगह भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में बरसात के दौरान नदियों और खड्डों में खनन गतिविधियां जारी रहना गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि उद्योग मंत्री, जो सिरमौर जिले से संबंध रखते हैं, विधानसभा में स्वयं कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के कारण अवैध खनन पर अंकुश नहीं लग पाने की बात कह चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार के स्तर पर अधिकारियों की मिलीभगत की बात सामने आ चुकी है तो ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।
चेतावनी दी कि यदि प्रशासन और संबंधित विभागों ने अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लगाई तो वह इस मामले को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के नाम भी शिकायत में शामिल कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।








