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क्षेत्रीय अस्पताल सोलन की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में सिजेरियन के दौरान नवाजात की टांग टूटने का मामला सामने आया है। अस्पताल में सामने आई इस लापरवाही के कारण बच्ची का वर्तमान में आईजीएमसी शिमला में इलाज चला हुआ है, जबकि मां क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में उपचाराधीन है।
नवजात के पिता सोलन निवासी विकास ने अस्पताल के डॉक्टर पर कथित लापरवाही के आरोप लगाए है। उन्होंने डीसी. और एसपी से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने डा. संजीव जैन के नेतृत्व में जांच कमेटी का गठन किया है। कमेटी में 5 सदस्य हैं। कमेटी को 2 दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। पिता विकास ने बताया कि 10 अक्तूबर को क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में उनकी पत्नी की सिजेरियन से डिलवरी हुई। डिलवरी के बाद उन्हें निर्देश दिए गए कि बच्ची को लेबर रूम ले जाएं। वे बच्ची को लेकर लेबर रूम ले गए। फिर कहा गया कि बच्ची को इंजैक्शन लगाकर लाओ।
पिता ने बताया कि जब वे इंजैक्शन लगाने पहुंचे तो वहां पर तैनात कर्मी ने बताया कि इसकी टांग में सूजन है। इसलिए इंजैक्शन नहीं लग सकता। इसके लिए एक्स-रे करवाओ। जब एक्स रे करवाया तो पता चला कि बच्ची की टांग टूटी हुई है। इसको लेकर उन्होंने सम्बन्धित डाक्टर से बात की तो उनका व्यवहार उनके प्रति ठीक नहीं था। बच्ची को आईजीएमसी ले जाने की सलाह दी गई। उनके माता-पिता व भाई उसी दिन बच्ची को आई.जी.एम.सी. लेकर गए। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल प्रशासन ने बच्ची को आईजीएमसी ले जाने में भी कोई मदद नहीं की। उन्होंने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो। क्षेत्रीय अस्पताल के एमएस डा. राकेश पंवर ने बताया कि मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन किया है, जो 2 दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी।









