आंज भोज क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार श्यामलाल पुंडीर ने लिखी महापर्व धनला की पुस्तक,आज उद्योग मंत्री ने किया विशेषांक का विमोचन
Khabron wala
पांवटा साहिब : आंज भोज क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार श्यामलाल पुंडीर ने शांत महापर्व धनला पर एक पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक का आज राज्यस्तरीय यमुना शरद महोत्सव में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस विशेषांक का विमोचन किया।
इस मौके पर श्यामलाल पुंडीर ने कहा कि पांवटा साहिब के आंज भोज क्षेत्र के धार्मिक स्थल धनला में हुए शांत महापर्व को पुस्तक में संजोने का प्रयास किया है।
गौरतलब है कि श्यामलाल पुंडीर हिमाचल प्रदेश के धार्मिक स्थल के इतिहास की एक श्रृंखला प्रकाशित कर रहे है। ये आगे भी जारी रहेगी। पांवटा साहिब के आंज भोज क्षेत्र के गांव आगरों से संबद्ध रखने वाले और पिछले 25 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। श्यामलाल पुंडीर ने इस बार 8वाँ संस्करण लिखा है।
हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के पांवटा साहिब से देश की आवाज न्यूज चैनल खबरों के साथ साथ पिछले तीन सालों से हिमाचल प्रदेश के हर जिले के प्रमुख मंदिरों के इतिहास को पुस्तक के माध्यम से जन जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। अब तक प्रकाशित 6 पुस्तकों में हिमाचल प्रदेश के हर जिले से प्रमुख 60 मंदिरों और गुरुद्वारों का इतिहास 6 संस्करणों में प्रकाशित हो चुका है। इस साल मार्च में सातवां अंक हिमाचल और उत्तराखंड के प्रमुख देवता छत्रधारी चालदा महासु महाराज को समर्पित रहा।
इस बार अक्टूबर का 8वाँ संस्करण जिला सिरमौर के पांवटा साहिब उप मंडल के आंज भोज क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल धनला में जून महीने में आयोजित शांत महापर्व के लिए समर्पित है।
ये शांत महापर्व विशेषांक है। इस बार के पूरे अंक में शांत महापर्व का सचित्र विवरण और हजारों की संख्या में उमड़ा आस्था का सैलाब की जानकारी प्रकाशित करने का प्रयास किया है। क्योंकि ये एक ऐतिहासिक पर्व था । जिसमें हजारों श्रद्धालु साक्षी बने।
पांवटा साहिब के आंज भोज की तलहटी पर बसे धनला गांव में शिरगुल महाराज और बिजट महाराज के एक साथ दर्शन होते है। सम्भवतः ये पहला ऐसा मंदिर जहां श्रद्धालु एक साथ दर्शन करते है।
इस पुस्तक में लेखक ने इतिहासकारो के द्वारा प्रकाशित लेखो, सोशल मीडिया से उपलब्ध जानकारी, जनश्रुतियों व मान्यताओं का उल्लेख किया गया है।
इस धार्मिक स्थल की मान्यता है कि चूड़धार में शिरगुल महाराज का शीश और धनला में पांव है। इसके अलावा इस स्थान का जिक्र टुंडू और कमरऊ की हारूल में भी है। इसका इतिहास लगभग 350 साल पुराना और रियासतकाल से हैं।










