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हिमाचल प्रदेश में तकनीकी शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप शुरू करने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है. प्रदेश सरकार ने तकनीकी शिक्षण संस्थानों के लिए राज्य नवाचार नीति (2026-2028) और राज्य नवाचार कोष के कार्यान्वयन दिशा-निर्देशों को मंजूरी दे दी है. इसके तहत सरकार ने दो वर्षों के लिए 2 करोड़ रुपये का इनोवेशन फंड भी स्वीकृत किया है. इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत बनाना है, ताकि युवाओं के नए आइडिया व्यवसाय और रोजगार के अवसरों में बदल सकें.
नवाचार को मिलेगा आर्थिक सहयोग
नई नीति के तहत विद्यार्थियों और शिक्षकों के नए विचारों को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें प्रोटोटाइप तैयार करने, स्टार्टअप शुरू करने और बाजार तक पहुंचाने में आर्थिक और तकनीकी सहायता दी जाएगी. इसके लिए माइक्रो ग्रांट, सीड फंडिंग, स्टार्टअप इनक्यूबेशन, बौद्धिक संपदा प्रबंधन, उद्योगों के साथ साझेदारी और क्षमता निर्माण जैसी कई योजनाएं शुरू की जाएंगी.
₹2 करोड़ के इनोवेशन फंड को मंजूरी
सरकार ने वर्ष 2026 से 2028 तक के लिए 2 करोड़ रुपये के राज्य नवाचार कोष का गठन किया है. इस फंड से तकनीकी संस्थानों में इनोवेशन प्रतियोगिताएं, बूट कैंप, विद्यार्थियों और शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम, इनक्यूबेशन सेंटर को मजबूत करने और उद्योगों व कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के सहयोग से विभिन्न परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जाएगी. इससे युवाओं को अपने नए विचारों को व्यावहारिक रूप देने में मदद मिलेगी.
महिलाओं और युवाओं पर रहेगा विशेष फोकस
सरकार ने इस नीति में समावेशी विकास पर भी विशेष जोर दिया है. महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को तकनीकी शिक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि नवाचार तभी सफल होगा, जब समाज के सभी वर्गों को समान अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि नई नीति के तहत विकसित होने वाले नवाचारों का स्वामित्व संबंधित नवाचारकर्ता के पास ही रहेगा, जबकि शैक्षणिक संस्थानों को केवल शैक्षणिक उपयोग के लिए नॉन-एक्सक्लूसिव अधिकार मिलेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा की तरह तकनीकी शिक्षा में भी आधुनिक व्यवस्था विकसित कर रही है, जिससे हिमाचल को देश के प्रमुख नवाचार केंद्रों में शामिल किया जा सके.
दो साल बाद होगी समीक्षा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस नीति की दो वर्षों बाद व्यापक समीक्षा की जाएगी. इस दौरान विकसित प्रोटोटाइप, स्थापित स्टार्टअप्स, बौद्धिक संपदा पंजीकरण, रोजगार सृजन और निवेश जैसे प्रमुख परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा. तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के निदेशक इस पूरी योजना के नोडल अधिकारी होंगे और राज्य स्तर पर गठित समितियां इसके प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेंगी.









