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हिमाचल से बिहार और नेपाल तक हो रही थी कोडीन युक्त कफ सीरप की तस्करी , पांवटा साहिब की 3 बी हेथकेयर बनी नशा सप्लाई करने का ठिकाना , पहले भी मालिक नीरज भाटिया हो चुका है गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश की साहिबाबाद थाना पुलिस ने ड्राई स्टेट में नशे के रूप में प्रयोग होने वाले कोडीनयुक्त कफ सीरप की बड़ी खेंप पकड़ी है। सोमवार रात पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर सीरप की करीब 50 हजार बोतलें बरामद की हैं। इनकी कीमत 85.80 लाख रुपये बताई गई है।पुलिस की स्वाट, सर्विलांस, औषधि विभाग और साहिबाबाद थाने की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर सोमवार रात सीमापुरी स्थित कसाना क्रेन कंपाउंड में छापेमारी की थी। गोदाम से विस्कोरेक्स कफ सिरप की 310 पेटियां मिलीं। इनमें कुल 49,600 बोतलें थीं। मौके पर मिले श्याम एंक्लेव निवासी वीरेंद्र सिंह, दिल्ली के विपिन गार्डन निवासी शिव शंकर कुमार और शहीद नगर निवासी राजेश कुमार तिवारी कफ सीरप के वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाए। प्रभारी सहायक पुलिस आयुक्त साहिबाबाद अमित सक्सेना ने बताया कि पुलिस ने मौके पर मिले तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। छानबीन में पता चला कि यह सीरप दिल्ली की जेवरन हेल्थ केयर कंपनी के नाम पर खरीदा गया था। हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब स्थित 3बी हेल्थ केयर लिमिटेड की ओर से तैयार किया जाने वाला सीरप जैवरन हेल्थ केयर के दिल्ली गोदाम पर ही होना चाहिए था, लेकिन इसे गाजियाबाद से बिहार भेजा जाना था। इसमें भी फर्जीवाड़ा मिला। आरोपियों ने जेवरन कंपनी से समस्तीपुर की नूतन फार्मा कंपनी को बिक्री दिखा रखी थी और माल पटना भेजने वाले थे।

3बी हेल्थकेयर की सहायक कंपनी विदित फार्मा जम्मू-कश्मीर में भाजपा नेता के बेटे नीरज भाटिया के खिलाफ नशीली दवाओं के रैकेट का खुलासा हुआ था , जिसमें उनकी पांवटा साहिब स्थित फैक्टरी से अवैध कोडीन सिरप की आपूर्ति का आरोप था। कंपनी मालिक ने चालाकी करते हुए विदित हेल्थकेयर कंपनी में नशा तस्करी बंद कर अपनी दूसरी कंपनी 3 बी हेथकेयर  से नशा तस्करी शुरू कर दी है इसके बाद कंपनी रडार पर आ गई है वही दलाल के रूप में काम करने वाले कथित कांग्रेसी अवनीत सिंह लांबा भी जांच के दायरे में है क्योंकि वह कंपनी में अपने आप को पार्टनर बता रहे हैं उनके खातों की जांच भी पुलिस द्वारा करने की मांग की गई है

 2024 में जम्मू-कश्मीर की नारकोटिक्स कंट्रोल टीम ने नशीली दवाओं के कारोबार से जुड़े एक बड़े रैकेट का खुलासा किया था , जिसमें भाजपा नेता के बेटे का नाम सामने आया था। इस मामले में पानीपत के भाजपा नेता नीतिसेन भाटिया का बेटा नीरज भाटिया गिरफ्तार हो गया है। नीरज भाटिया के सिरमौर स्थित पांवटा साहिब में चल रही दवा फैक्टरी “विदित हेल्थकेयर” पर आरोप है कि उसने नशीली दवाओं से बने सिरप की आपूर्ति की थी।

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि नीरज भाटिया की फैक्टरी से बिना उचित दस्तावेज और एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए जम्मू-कश्मीर की फर्जी कंपनियों को कोडीन आधारित सिरप की आपूर्ति की जा रही थी। सात साल से चल रहे इस रैकेट में 3 लाख बोतलों की आपूर्ति की गई, जिससे राज्य के स्वास्थ्य सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

नारकोटिक्स कंट्रोल टीम ने जांच के दौरान 34 किलोग्राम कोडीन आधारित सिरप बरामद किया और आरोपियों की अवैध संपत्ति के रूप में 3.65 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को फ्रीज कर दिया। इस मामले में कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था। भाजपा नेता के बेटे की फर्म पर पानीपत में ई डी ने कार्रवाई  की गई थी । जम्मू-कश्मीर की नारकोटिक्स कंट्रोल टीम ने पांवटा साहिब की दवा विदित फार्मा कंपनी पर  दबिश दी थी और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।

पुलिस जेवरन कंपनी के मालिक पुरोहित गुप्ता उर्फ भोला को भी तलाश रही है। पुलिस के मुताबिक भोला बिहार का है। सीरप लाने और ले जाने वाली संध्या ट्रांसपोर्ट कंपनी भी बिहार की है। खास बात है कि जेवरन कंपनी दो साल से सीरप मंगाकर सिर्फ बिहार में बेच रही है। संध्या ट्रांसपोर्ट कंपनी भी करीब दो साल से सिर्फ कोडीन युक्त कफ सीरप को ही ट्रांसपोर्ट कर रही है। दूसरा किसी भी तरह का कोई माल इस कंपनी ने नहीं भेजा। सहायक पुलिस आयुक्त ने बताया कि ये सभी फर्जी कंपनी सिर्फ सीरप की तस्करी के लिए बनाई गई हैं।

पुलिस के मुताबिक सामान्य मेडिकल स्टोर के जरिए सीरप की बिक्री करने के मुकाबले नशे के लिए तस्करी करने में कमाई 10 गुना तक होती है। सहायक पुलिस आयुक्त का कहना है कि मेडिकल स्टोर से लोग बीमारी के लिए खरीदते हैं और यह एमआरपी पर ही बिकती है। वहीं तस्करी वाली सीरप का इस्तेमाल नशे में होता है। नशे में इसका सेवन अधिक मात्रा में होता है, जिस कारण खपत अधिक होती है। एमआरपी से दो से तीन गुना कीमत में बिकती है और बांग्लादेश में इसकी बिक्री पांच गुना दाम पर की जाती है। इसीलिए फर्जी फर्म बनाकर सीरप की तस्करी की जाती है। ड्राई स्टेट जैसे बिहार और गुजरात में इसकी सबसे ज्यादा तस्करी की जाती है।

तस्करी का तरीका और मात्रा

हर महीने खपाते हैं दो लाख बोतल

आरोपियों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब स्थित 3 बी हेल्थकेयर कंपनी से माल दिल्ली के बजाय सीधे गाजियाबाद में उतारा जाता है। इसके बाद बिना पहचान वाले गत्तों में भरकर ट्रकों में लोडिंग की जाती है। पुलिस, राज्य कर विभाग, औषधि विभाग समेत तमाम टीमों से बचने के लिए परचुन का सामान भी ट्रकों में भर लेते हैं। इसके बाद गाजियाबाद से बिहार माल भेजा जाता है। आरोपियों ने बताया कि हर महीने तीन से चार बार माल मंगाकर बिहार भेजा जाता है यानी हर महीने सीरप की दो लाख बोतलों की तस्करी की जा रही है।

पुलिस इस मामले में निर्माता कंपनी से भी पूछताछ की करेगी। कंपनी कब से माल खरीद रही थी और कितनी खरीदारी की जा चुकी है। वहीं बिहार की नूतन फार्मा की भी जांच की जा रही है। पूर्व में पकड़े गए गिरोह से इन आरोपियों का लिंक अभी तक नहीं मिला है। भोला समेत कई अन्य आरोपियों को पुलिस तलाश कर रही है।

कोडीन युक्त कफ सीरप तस्करी का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय सीमाओं (बांग्लादेश) तक फैला हुआ है। नवंबर 2025 में नंदग्राम पुलिस और क्राइम ब्रांच ने मेरठ रोड स्थित मछली गोदाम पर छापा मारकर 3.40 करोड़ रुपये की सीरप की बोतलें बरामद की थीं। यह नेटवर्क इंदौर से गुवाहाटी और बांग्लादेश सीरप की तस्करी करता था। आरोपियों को बचाने के लिए चार लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में इंस्पेक्टर रमेश सिद्धू को गिरफ्तार किया गया था। फरवरी 2026 में मुख्य आरोपी सौरभ त्यागी की दो करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति कुर्क की गई थी। आरोपी विभोर राणा और विशाल सिंह की 12.55 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति को फ्रीज किया गया था।

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