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एंड्रायड मोबाईल न होने से गरीब बच्चे घर पर नहीं कर पाएंगे पढ़ाई

शिक्षा विभाग द्वारा लॉकडाउन के दौरान स्कूली बच्चों को रोजमर्रा की पढ़ाई से जोड़ने  के उददेश्य से सरकार द्वारा हर घर बने पाठशाला नामक ऐप तैयार की गई है। ताकि बच्चे घर पर एंड्रायड मोबाईल फोन के माध्यम से अपनी पढ़ाई जारी रख सकेे । हालांकि सरकार कोविड-19 के संकट के कारण प्रभावित हो रही बच्चों की पढ़ाई  बारे  चिंतित है  परंतु गांव के स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले  बच्चों के अभिभावकों के पास एंड्रायड मोबाईल फोन नहीं है जिस कारण गांव के करीब 60 प्रतिशत बच्चे ऑनलाईन पढ़ाई करने से वंचित रह जाएगें । जबकि साधन संपन लोगों के बच्चे इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं ।

सरकार के आदेशों के उपंरात इन दिनों शिक्षक बच्चों के मोबाईल नंबर का ग्रुप बनाने में व्यस्त है । विभिन्न स्कूल के शिक्षकों  से संपर्क करने पर ज्ञात हुआ कि अधिकांश बच्चों के अभिभावकों के पास एंड्रायड मोबाईल फोन ही नहीं है और बच्चों द्वारा एंड्रायड फोन का इस्तेमाल करने वाले  रिश्तेदार अथवा गांव के व्यक्तियों के नंबर दिए जा रहे है जिससे उनका उददेश्य हल नहीं हो रहा है। राजगढ़ के साथ लगते  गांव गानिया में अजीत  ठाकुर की दो बेटियां प्रगति और आकृति जो डीएवी सोलन मे पढ़ती है और इन दिनों मोबाईल एप के माध्यम से दूरदराज गांव में ऑन लाईन पढ़ाई करने में व्यस्त है ।

गौर रहे कि कोरोना वायरस के संकट के चलते सरकार ने केवल परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के अतिरिक्त  15 मार्च से सभी स्कूलों को बंद कर दिए गए थे । सबसे अहम बात यह हैं कि अधिकांश शिक्षक इस दौरान अपने घरों को चले गए है । दूसरी ओर   स्थानीय शिक्षक भी परेशान है कि उन्हें प्रतिदिन ऑनलाईन इस बारे रिपोर्ट भेजनी होती है परंतु टेªनिग के अभाव में एप सारी प्रक्रिया बारे जानकारी भी नहीं है और ग्रामीण क्षेत्रों में सिगनल की भी काफी समस्या रहती है ।बीआरसीसी मशोबरा प्रेम चौहान ने बताया कि जिन बच्चों के पास यह सुविधा नहीं है  सरकार ने  ऐसे मामलों में छूट दे रखी है। उन्होने बताया कि ऐसे बच्चों के साथ शिक्षकों द्वारा कॉल करके प्रतिदिन स्कूल का काम दिया जाएगा ।

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