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हिमाचल में फ्यूल संकट की आहट: अब बिना कैश नहीं मिलेगा एक बूंद भी पेट्रोल-डीजल

हिमाचल प्रदेश में अब सरकारी गाड़ियां हों या निर्माण कार्यों में लगी मशीनें—बिना नकद भुगतान के एक बूंद तेल भी नहीं मिलेगा। वैश्विक युद्ध की तपिश और तेल कंपनियों पर बढ़ते आर्थिक बोझ ने प्रदेश के पेट्रोल पंप संचालकों को एक कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। हिमाचल प्रदेश पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने दशकों से चली आ रही ‘उधार की परंपरा’ पर पूरी तरह से पूर्णविराम लगा दिया है।

क्यों बदला तेल का गणित?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संघर्षों के कारण कच्चे तेल की सप्लाई चेन चरमरा गई है। तेल कंपनियां भारी घाटे का सामना कर रही हैं, जिसके चलते उन्होंने पेट्रोल पंप मालिकों को दी जाने वाली 2 से 4 दिनों की क्रेडिट सुविधा को समाप्त कर दिया है। अब तेल डिपो से स्टॉक उठाने के लिए डीलरों को ‘कैश एंड कैरी’ मॉडल के तहत तुरंत या एडवांस भुगतान करना पड़ रहा है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष सुकुमार सिंह के मुताबिक, जब डीलर खुद कंपनियों को एडवांस पैसा दे रहे हैं, तो वे ग्राहकों को उधार तेल देने की स्थिति में नहीं रहे। इसी वित्तीय संकट को देखते हुए यह कड़ा निर्णय लिया गया है।

विकास कार्यों पर मंडराया संकट

आगामी सोमवार से लागू होने वाली इस व्यवस्था का सीधा असर इन क्षेत्रों पर पड़ने वाला है।

सरकारी विभाग: पीडब्ल्यूडी और जल शक्ति विभाग जैसे बड़े महकमों को अब तेल के लिए तत्काल बजट का प्रावधान करना होगा।

निर्माण इकाइयां: सड़कों और पुलों के निर्माण में लगी मशीनों को डीजल न मिलने से काम रुक सकता है।

परिवहन सेवाएं: परिवहन के पहिये थमने का खतरा पैदा हो गया है यदि समय पर नकद भुगतान सुनिश्चित नहीं हुआ।

छोटे व्यवसायों की बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से सबसे अधिक चोट छोटे ठेकेदारों और छोटे व्यापारिक घरानों को लगेगी, जिनका काम क्रेडिट साइकिल पर निर्भर रहता था। बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्थाएं समय पर दुरुस्त न होने की स्थिति में प्रदेश के भीतर ईंधन की सप्लाई में बड़ा व्यवधान आ सकता है।

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि सोमवार से पहले सभी संस्थान अपनी वित्तीय व्यवस्थाएं नकद या ऑनलाइन भुगतान के लिए तैयार रखें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में ईंधन की कमी न हो।

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