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हिमाचल के सबसे समृद्ध मंदिर मां चिंतपूर्णी धाम में श्रद्धालुओं की तरफ से अर्पित धनराशि से खरीदी गाड़ियों के दुरूपयोग पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर न्यास की प्रॉपर्टी के दुरुपयोग पर कड़ा संज्ञान लिया है. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने ऊना के डीसी व पुलिस द्वारा प्रयोग की जारी गाड़ियों को जब्त करने के आदेश जारी किए हैं. ट्रस्ट के धन से ली गई गाड़ी डीसी ऊना काम में ला रहे थे. साथ ही मंदिर को दान की गई एक गाड़ी, जिसका उपयोग पुलिस विभाग कर रहा है, उसको भी जब्त करने के आदेश जारी किए हैं.
मामले में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता अंकुर कालिया की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद मुख्य सचिव सहित प्रधान सचिव (भाषा, कला एवं संस्कृति)-सह- मुख्य आयुक्त (मंदिर) को भी नोटिस जारी किया है. याचिकाकर्ता ने डीसी ऊना जतिन लाल, सह- आयुक्त, मंदिर प्रबंधन समिति/मंदिर न्यास माता चिंतपूर्णी और राघव शर्मा, आईएएस, (तत्कालीन डीसी ऊना-सह-आयुक्त, मंदिर प्रबंधन समिति माता श्री चिंतपूर्णी को भी प्रतिवादी बनाया है.
प्रार्थी ने मांग की है प्रतिवादी जतिन लाल डीसी ऊना को मंदिर के कोष से खरीदी गई टोयोटा इनोवा क्रिस्टा गाड़ी के किसी भी प्रयोजन के लिए उपयोग करने से रोका जाए. साथ ही उक्त वाहन को जब्त करके अंतिम आदेशों तक सुरक्षित अभिरक्षा में रखा जाए. प्रार्थी ने मांग की है कि प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाए कि वे माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट की सभी चल और अचल संपत्तियों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखें.
अदालत की पूर्व अनुमति के बिना मंदिर की किसी भी संपत्ति को किसी और को देने, हस्तांतरित करने, बेचने, दान करने और किसी अन्य तरीके से उसका निपटारा करने पर रोक लगाने की मांग भी की गई है. प्रतिवादी राघव शर्मा को तीस लाख रुपये की राशि का एक व्यक्तिगत बॉन्ड पेश करने के आदेश की मांग भी की गई है, जिसमें यह वचन दिया गया हो कि यदि हाईकोर्ट यदि उन्हें व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराता है, तो वे ₹229,75,428/- की राशि को ब्याज सहित अपने निजी कोष से चुकाएंगे.
प्रतिवादियों को 2022-2024 की अवधि के लिए सभी वाहनों जिनमें मारुति सुजुकी और टाटा सफारी शामिल हैं की मूल लॉग बुक पेश करने के आदेश की मांग भी की गई है. ताकि उनके वास्तविक उपयोग और स्थिति का पता लगाया जा सके. प्रतिवादियों को ‘माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट’ के स्वामित्व या नियंत्रण में वर्तमान में मौजूद सभी वाहनों की सूची प्रस्तुत करने के साथ साथ उनके वर्तमान उपयोग, रखरखाव के रिकॉर्ड और जिस प्राधिकार के तहत उनका संचालन किया जा रहा है, उससे संबंधित विवरण भी उपलब्ध करवाने के आदेश की मांग की गई है. प्रार्थी ने याचिका में ट्रस्ट की संपतियों का दुरुपयोग करने और हाईकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना के आरोप लगाए हैं.








