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हिमाचल की इस पंचायत के 45 लोग जवानी में ही ले रहे बुढ़ापा पैंशन का मजा! विभाग ने शुरू की जांच

Khabron wala

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला के रोहड़ू उपमंडल से वृद्धावस्था पैंशन योजना में एक बड़े फर्जीवाड़े और अनियमितता का मामला सामने आया है। तांगण-जांगलिख पंचायत में 44 से 54 वर्ष की आयु के लोग भी कागजों में बुजुर्ग बनकर वृद्धावस्था पैंशन का लाभ उठा रहे हैं। इस मामले में लगभग 45 संदिग्ध लाभार्थियों के नाम सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, जिसके बाद संबंधित विभाग ने रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं।

2018 से चल रहा है फर्जीवाड़े का खेल
जानकारी के अनुसार ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत में नियमों को ताक पर रखकर, निर्धारित आयु सीमा पूरी किए बिना ही कई लोगों की वृद्धावस्था पैंशन लगा दी गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई लोग तो वर्ष 2018-19 से ही इस पैंशन का लाभ उठा रहे हैं। वहीं, कुछ अन्य नाम वर्ष 2021 के बाद इस सूची में जोड़े गए हैं। सूत्रों के मुताबिक इन 45 संदिग्धों में तांगण गांव के 20 और जांगलिख क्षेत्र के 25 लोग शामिल हैं। इनमें पुरुष और महिलाएं दोनों के नाम हैं।

परिवार रजिस्टर और दस्तावेजों में हेराफेरी का आरोप
इस पूरे प्रकरण में पंचायत स्तर पर बड़ी मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि पैंशन को मंजूर करवाने के लिए पंचायत स्तर पर परिवार रजिस्टर और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों में भारी हेराफेरी की गई है। उम्र बढ़ाकर इन लोगों को कागजों में पात्र दर्शाया गया और पैंशन स्वीकृत करवा ली गई।

विभाग ने शुरू की ऑनलाइन और ऑफलाइन रिकॉर्ड की जांच
शिकायतें सामने आने के बाद कल्याण विभाग सतर्क हो गया है और ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरह के रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच की जा रही है। इस संबंध में जिला कल्याण अधिकारी कपिल शर्मा ने बताया कि मामले की गहनता से जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि अभी जांच शुरूआती चरण में है, इसलिए फिलहाल कुछ भी स्पष्ट रूप से कहना जल्दबाजी होगी। वहीं, सहायक आयुक्त एवं बीडीओ कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि पैंशन स्वीकृति की प्रक्रिया अलग होती है और विभागीय स्तर पर सभी तथ्यों की सत्यता जांची जा रही है।

इस फर्जीवाड़े को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष पनप रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन अब तक कोई सख्त कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

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