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कहते हैं कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। इस कहावत को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के अंतर्गत आते आलमपुर निवासी प्रवीण राणा और उनकी 23 वर्षीय बेटी अंशिका राणा ने। इस पिता-पुत्री की जोड़ी ने न केवल एक ही कक्षा में बैठकर कानून (एलएलबी) की पढ़ाई की, बल्कि शानदार सफलता हासिल कर समाज के सामने एक बड़ी मिसाल कायम की है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की तीन वर्षीय एलएलबी के अंतिम परिणाम में बेटी अंशिका ने प्रथम स्थान हासिल किया है, जबकि पिता प्रवीण राणा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।
जानकारी के अनुसार, पिता-पुत्री ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र खनियारा, धर्मशाला में वर्ष 2023 में तीन वर्षीय एलएलबी में एक साथ प्रवेश लिया था। करीब तीन वर्षों तक दोनों ने एक ही कक्षा में पढ़ाई की और जून 2026 में अपनी कानून की डिग्री पूरी की। बेटी अंशिका राणा ने न केवल ओवरऑल परिणाम में, बल्कि छठे सैमेस्टर में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे बैच में टॉप किया
।ड्यूटी और उम्र नहीं बन सकी बाधा
इस उपलब्धि की सबसे खास बात पिता प्रवीण राणा का जज्बा है। उन्होंने 50 वर्ष की उम्र पार करने के बाद एलएलबी की पढ़ाई शुरू करने का साहस दिखाया। वर्तमान में प्रवीण राणा पुलिस प्रशिक्षण केंद्र डरोह में इंस्पैक्टर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पुलिस विभाग की भारी जिम्मेदारियों और ड्यूटी के दबाव के बावजूद, उन्होंने नियमित अध्ययन जारी रखा और साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य के प्रति जुनून हो तो उम्र या नौकरी कभी बाधा नहीं बनती।
डिग्री नहीं, बच्चों के लिए उदाहरण पेश करना था लक्ष्य
अपनी इस शानदार सफलता पर इंस्पैक्टर प्रवीण राणा ने कहा कि एलएलबी करना उनके लिए महज एक डिग्री हासिल करना नहीं था। उनका मुख्य उद्देश्य खुद को लगातार शिक्षित करना और अपने बच्चों के सामने यह उदाहरण प्रस्तुत करना था कि शिक्षा और सीखने की कोई आयु सीमा नहीं होती। पिता के इस जज्बे के साथ कदम मिलाते हुए 23 वर्षीय अंशिका ने भी टॉपर बनने का गौरव हासिल किया।
इलाके में खुशी की लहर, लोगों के लिए बनी प्रेरणा
एक ही कक्षा में पढ़कर बेटी का पहला और पिता का तीसरा स्थान हासिल करना पूरे आलमपुर क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गया है। परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों ने पिता-पुत्री को बधाई देते हुए कहा है कि यह सफलता उन युवाओं और लोगों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो उम्र बढ़ने या नौकरी की व्यस्तता के कारण अपनी पढ़ाई और अधूरे सपनों को बीच में ही छोड़ देते हैं।












