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चार्ज फ्रेम होने के बाद भी पीड़ित पक्ष की मांग पर फिर से हो सकती है जांच, पांवटा साहिब में हत्या से जुड़ा हैं मामला , हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

चार्ज फ्रेम होने के बाद भी पीड़ित पक्ष की मांग पर फिर से हो सकती है जांच, पांवटा साहिब में हत्या से जुड़ा हैं मामला , हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने क्रिमिनल केसिज में निष्पक्ष जांच को लेकर एक अहम कानूनी फैसला दिया है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस जांच में कोई गंभीर कमी या खामी रह जाती है, तो चार्जशीट दाखिल होने या चार्जिज फ्रेम होने के बाद भी शिकायतकर्ता यानी पीड़ित पक्ष की अर्जी पर अदालत आगे की जांच के आदेश दे सकती है.

हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने एक मामले की सुनवाई करते हुए पांवटा साहिब के अतिरिक्त सत्र अदालत के पुराने आदेश को रद्द कर दिया. लोअर कोर्ट ने शिकायतकर्ता की आगे की जांच वाली याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि ऐसी मांग सिर्फ जांच एजेंसी ही कर सकती है, शिकायतकर्ता नहीं. मामले के अनुसार मृतक अशरफ अली के भाई अर्शीद अली की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ हत्या के आरोप में नवंबर 2025 में एफआईआर दर्ज की गई थी. पुलिस ने जांच पूरी कर सक्षम अदालत में गैर-इरादतन हत्या के तहत चार्जशीट दाखिल की. इस पर सक्षम अदालत ने संज्ञान लिया. यह मामला आगे की सुनवाई और ट्रायल के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पांवटा साहिब की अदालत में भेजा गया.

शिकायतकर्ता ने पुलिस जांच में गंभीर कमियां बताते हुए कोर्ट में आगे की जांच कराने के लिए आवेदन किया. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, पांवटा साहिब ने शिकायतकर्ता की इस अर्जी को खारिज कर दिया. इसके बाद शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया. यह मामला अशरफ अली की कथित हत्या से जुड़ा है. उसे कथित तौर पर गाड़ी से कुचलकर मार डाला गया था. शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना का पूरा वीडियो आरोपियों ने खुद अपने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया था और उसे सोशल मीडिया पर भी शेयर किया था, जिसमें एक आरोपी दूसरे को कुचल दे कहते हुए सुनाई दे रहा है. वही पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी की फुटेज भी खंगाली थी जिसमें हत्या कि वारदात कैमरे में कैद हुई थी पुलिस ने इस मामले में हत्या के बजाय गैर-इरादतन हत्या की चार्जशीट बनाई थी . शिकायतकर्ता ने पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस की सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि पुलिस ने घटना का वीडियो होने के बावजूद आरोपियों के मोबाइल फोन को फॉरेंसिक लैब जांच के लिए भेजा ही नहीं और मुख्य चश्मदीद गवाह शेर खान का बयान भी दर्ज नहीं किया. हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता भी जांच के इस चरण में अर्जी दे सकता है.

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