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हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में चर्चित प्राची राणा हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. स्पेशल जज ऊना नरेश ठाकुर की अदालत ने 15 वर्षीय छात्रा प्राची राणा की हत्या के मामले में आरोपी आसिफ मोहम्मद को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उसे तीन वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा.
चार साल बाद आया अदालत का फैसला
यह मामला 5 अप्रैल 2022 का है, जब अंब उपमंडल के प्रतापनगर में दसवीं कक्षा की छात्रा प्राची राणा की उसके घर में घुसकर हत्या कर दी गई थी. घटना के समय प्राची की छोटी बहन स्कूल गई हुई थी, जबकि उसके माता-पिता अपने-अपने कार्यस्थलों पर थे. वार्षिक परीक्षाओं के चलते प्राची उस दिन घर पर अकेली थी. अभियोजन पक्ष के अनुसार, अखबार वितरक आसिफ मोहम्मद दोपहर करीब एक बजे प्राची के घर पहुंचा और पेपर कटर से उसका गला काटकर हत्या कर दी. शाम को जब उसकी मां अनुपमा घर लौटीं तो उन्होंने बेटी को डाइनिंग हॉल में खून से लथपथ मृत अवस्था में पाया. इसके बाद परिवार और पुलिस को सूचना दी गई.
जांच में ऐसे पहुंची पुलिस आरोपी तक
घटना के बाद पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाए और जांच शुरू की. दो दिन की पड़ताल के दौरान एक प्रवासी मजदूर ने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन उसने घर से बच्ची के चिल्लाने की आवाज सुनी थी. साथ ही उसने एक अखबार बांटने वाले युवक को घर से निकलते हुए भी देखा था. इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने 7 अप्रैल 2022 को आसिफ मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इसके बाद पुलिस ने उसकी निशानदेही पर अंब के पक्का परोह क्षेत्र से हत्या में इस्तेमाल किया गया पेपर कटर बरामद किया. आरोपी ने इस हथियार को घटना के बाद छिपा दिया था. मामले की जांच में पुलिस कांस्टेबल राजीव की भूमिका भी अहम मानी गई, जिन्होंने केस को सुलझाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 28 गवाह पेश किए. जिला न्यायवादी एकलव्य ने मामले की प्रभावी पैरवी की. सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 302 के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने आरोपी को धारा 452 और धारा 201 के तहत भी दोषी पाया. इन धाराओं के तहत उसे तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है. जुर्माना न देने पर एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिवार को चार साल बाद न्याय मिलने की उम्मीद जगी है.












