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प्रदेश हाईकोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार कानून पर एक बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पैतृक संपत्ति पर बेटियों का उतना ही कानूनी अधिकार है जितना कि बेटों का। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने ऊना जिला से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए अपीलकर्ता की अपील को खारिज कर दिया। यह विवाद करतार चंद की संपत्ति को लेकर था, जिनकी बिना वसीयत बनाए मृत्यु हो गई थी। आरोप था कि उनके जाने के बाद बेटे रोशन लाल ने राजस्व स्टाफ की मिलीभगत से जमीन का इंतकाल अपने नाम करवा लिया था।
अपीलकर्त्ता के वकील ने दलील दी थी कि हिंदू उत्तराधिकार संशोधन अधिनियम, भविष्य के मामलों के लिए लागू होता है, इसलिए बेटियों को पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मिल सकता। इस दलील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि बेटी एक बेटे की तरह जन्म लेते ही पैतृक संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार बन जाती है। कोर्ट ने कहा कि कानून संशोधन (9 सितंबर 2005) के समय पिता का जीवित होना कतई अनिवार्य नहीं है।












