बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गरिमा की रक्षा के लिए विद्यार्थियों ने उठाई आवाज़, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी गवर्नमेंट कॉलेज, पांवटा साहिब एवं बीकेडी कॉलेज ऑफ एजुकेशन फॉर वुमेन, पांवटा साहिब के विद्यार्थियों ने आज नीट पेपर लीक प्रकरण तथा छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के उपरांत विद्यार्थियों ने उपमंडल अधिकारी (एसडीएम), पांवटा साहिब के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन सौंपा।
विद्यार्थियों ने कहा कि पेपर लीक केवल एक परीक्षा में हुई अनियमितता नहीं, बल्कि लाखों मेहनती विद्यार्थियों के सपनों, वर्षों की मेहनत और उनके उज्ज्वल भविष्य पर सीधा प्रहार है। यदि परीक्षाओं की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं, तो देश के युवाओं का विश्वास भी कमजोर होता है। इसलिए दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
ज्ञापन में मांग की गई कि नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जाए।
विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने वाले छात्रों की आवाज़ को बल प्रयोग से दबाने के बजाय उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। शिक्षा, संविधान और लोकतंत्र की भावना यही है कि युवाओं की आवाज़ का सम्मान किया जाए।
प्रदर्शन में विद्यार्थियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं ने देश के करोड़ों छात्रों का विश्वास डगमगा दिया है, जिसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
विद्यार्थियों ने दोहराया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संविधानसम्मत है। यह किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक विद्यार्थी के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और न्याय की मांग के लिए है।
मुख्य मांगें
– नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच।
– दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई।
– परीक्षा प्रणाली को पूर्णतः सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाया जाए।
– छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज़ का सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
– केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें।
“शिक्षा बिकेगी नहीं, भविष्य झुकेगा नहीं।”
“बच्चों का भविष्य सुरक्षित करो — शिक्षा व्यवस्था मजबूत करो।”

