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Solan: राष्ट्रीय राजमार्ग ब्रिज प्रोजेक्ट में फर्जी M-Form का बड़ा खेल, कंपनी पर FIR दर्ज

Khabron wala

हिमाचल प्रदेश के बद्दी पुलिस जिले के अंतर्गत पुलिस थाना नालागढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-105) ब्रिज परियोजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। परियोजना के निर्माण कार्य के लिए खनन सामग्री की आपूर्ति में कथित तौर पर फर्जी एम-फॉर्म /ट्रांजिट पास का इस्तेमाल किया गया है। मामला सामने आने के बाद बद्दी पुलिस ने नामजद आरोपियों और कंपनियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह बड़ी कार्रवाई हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय, शिमला में प्राप्त हुई एक शिकायत के आधार पर अमल में लाई गई है। शिकायत मिलने के बाद एक राजपत्रित पुलिस अधिकारी द्वारा निष्पक्ष जांच सौंपी गई थी। जांच के दौरान जब खनन विभाग की सत्यापन रिपोर्ट, जीएसटी रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन, रनिंग अकाउंट बिल तथा प्रोजेक्ट से संबंधित अन्य दस्तावेजों का मिलान किया गया, तो काफी संख्या में एम-फॉर्म/ट्रांजिट पास कथित तौर पर फर्जी पाए गए।

प्राथमिक जांच में ‘ठाकुर रुहानी स्टोन क्रशर’ से खनन सामग्री की आपूर्ति तथा संबंधित फर्जी दस्तावेजों के बीच सीधा संबंध सामने आया है। इसके अतिरिक्त, निर्माण स्थल पर दस्तावेजों के सत्यापन में हुई संभावित अनियमितताओं की भी गहनता से जांच की जा रही है।

इस मामले में पुलिस ने अंचित ठाकुर (पुत्र के० एल० ठाकुर), मैसर्स गणपति भारत प्राइवेट लिमिटेड तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध पुलिस थाना नालागढ़ में भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत एफआईआर पंजीकृत की है।

एम-फॉर्म हिमाचल प्रदेश के खनन विभाग द्वारा जारी किया जाने वाला एक कानूनी और अनिवार्य “रॉयल्टी पास/परमिट” होता है। जब भी किसी लीगल स्टोन क्रशर या खदान से रेत, बजरी, पत्थर या गिट्टी खरीदी जाती है, तो वाहन में माल ले जाने के लिए यह पास जारी किया जाता है। रॉयल्टी चोरी करने और अवैध खनन का माल सरकारी व बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में खपाने के लिए कुछ लोग नकली, एडिटेड या एक ही नंबर के फर्जी एम-फॉर्म तैयार कर लेते हैं। नालागढ़ मामले में भी जीएसटी और बैंकिंग रिकॉर्ड की पड़ताल से इसी तरह के फर्जी पास पकड़े गए हैं।

पुलिस का कहना है कि मामले की गहनता से तफ्तीश जारी है। कथित फर्जी दस्तावेजों की उत्पत्ति (Origination), उनके इस्तेमाल के नेटवर्क तथा इसमें शामिल सभी व्यक्तियों और अधिकारियों की भूमिका का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। पुलिस जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी शिकंजा कस सकती है।

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