मियां भये कोतवाल-फिर डर काहे का अर्थात सरकार द्वारा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की निरिक्षण शक्तियां छीनने के उपरांत होटल-ढाबा और फल सब्जियां बेचने वाले के पौ बारह हो गए है और लोगों से मनमाने रेट वसूले जा रहे है । राजगढ़-सोलन रोड़ के सनौरा में एक ढाबा में चाय का कप 15 रूपये बेचा जा रहा है जिसका बोर्ड बाहर सड़क पर लगा रखा है । ढाबा मालिक का कहना है कि उन्हें 10 रूपये में चाय का कप बेचने में लाभ नहीं मिल रहा है जबकि सनौरा में अन्य होटल और गिरिपुल मंे चाय का कप 10 रूपये बिक रहा है । यही नहीं राजगढ़ बाजार में फल व सब्जियों के रेट में बहुत भिन्नता पाई जा रही है । इसके अतिरिक्त होटल ढाबा मालिकों द्वारा ब्रेकफास्ट, लंच के रेट भी मनमाने ढंग से लिए जा रहे है।
पच्छाद कांग्रेस के महासचिव विवेक शर्मा और दिनेश आर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा व्यापारियों को लाभ देने के दृष्टिगत खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षकों पंगू बनया गया है जिसके चलते अब व्यापारी वर्ग पर सरकार का कोई नियंत्रण न होने से उपभोक्ताओं से मनमाने रेट वसूले जा रहे है जिससे विशेषकर गरीब लोगों का का शोषण हो रहा है । उन्होने कहा कि भाजपा सरमायेदारों की पार्टी है ओैर भाजपा सरकार द्वारा आम आदमी का नहीं बल्कि व्यापारी वर्ग का विशेष ध्यान रखा जाता है। उन्होने बताया कि सरकार द्वारा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को पंगू बनाया जाना बहुत चिंतनीय विषय है जिससे बिल्कुल स्पष्ट होता है कि भाजपा सरकार को केवल दुकानदारों की चिंता है ।
बता दें कि प्रदेश में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा मार्किट में खाद्य वस्तुओं के रेट निर्धारित करने के लिए विशेष भूमिका निभाई जाती थी और दुकानदार भी अधिक दाम वसूलने पर डरते थे । परंतु वर्तमान सरकार द्वारा सता में आते ही विभाग की निरीक्षण शक्तियों को छीन लिया गया जिससे दुकानदार भयमुक्त हो गए । उन्होने सरकार से मांग की है कि विभाग के अधिकारियों की निरीक्षण शक्तियां बहाल की जाए ताकि प्रदेश की मार्किटों में खाद्य वस्तुओं के दाम में एकरूपता बनी रह सके और आम आदमी का शोषण भी न हो ।
खाद्य एवं आपूर्ति निरिक्षक राजगढ़ पदम देव से जब इस बारे बात की गई तो उन्होने कहा कि उनके पास अब खुले बाजार की वस्तुओं की रेट लिस्टें चैक करने की पॉवर नहीं है । उन्होने कहा कि यदि कोई होटल ढाबा मालिक द्वारा अधिक रेट वसूले जा रहे है तो विभाग इस बारे कुछ नहीं कर सकता है । उन्होने बताया कि प्याज के रेट के निरीक्षण के लिए सरकार द्वारा कुछ दिन केवल दो माह की शक्तियां दी गई थी ।











