राज्य में एक सप्ताह से बड़े स्तर पर हाइपोक्लोराइड सुरंगे स्थापित की जा रही हैं, ताकि ऐसी किटाणुशोधन सुरंगों से गुजरने वाले को किटाणुरहित किया जाए। इससे जुड़ी एक अहम खबर आ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि हाइपोक्लाराइड सोल्युशन का इस्तेमाल केवल निर्जीव वस्तुओं पर ही उपयोगी है। बल्कि इसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति पर करना नुक्सानदेह हो सकता है। विभाग ने यह सर्कुलर डब्ल्यूएचओ की एडवाइजरी के मद्देनजर जारी किया है।
हालांकि विभाग ने अपने स्तर पर किसी भी संस्थान में ऐसी सुरंगे स्थापित नहीं की हैं, लेकिन कई स्थानों पर उद्योगों द्वारा ही अस्पतालों में भी हाइपोक्लोराइड सुरंगे स्थापित कर दी गई हैं। इन्हें जल्द से जल्द हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि अल्कोहल व क्लोरिन का पूरे शरीर पर छिड़काव करने से भी किटाणु शोधन नहीं होता,बल्कि तरल में गुजरने के बाद व्यक्ति को गलतफहमी भी हो सकती है कि वो किटाणुरहित है।
वहीं पावटा साहिब में भी एक उद्योग ने दिखावा कर यह दिखाने की कोशिश की थी कि वही कोरोना वायरस के लड़ने को आगे है तथा बड़े हॉस्पिटल में भी यह सैनिटाइजर टनल दान करने की घोषणा कर दी थी जबकि अभी तक यह भी साबित नहीं हुआ था इससे कोरोना वायरस को रोकने में कोई सहायता मिलेगी जबकि भारी संख्या में लोगों व मीडिया कर्मी को बुलाकर सिर्फ दिखावा करने की कोशिश की गई थी क्या यह सब अपनी कम्पनी के सैनिटाइजर को प्रमोट करने का एक तरीका था वही सुखराम चौधरी को बुलाने का उदेश्जय पर भी सवालिया निशान लग गये है बताया यह भी जा रहा है कि पावटा साहिब में विधायक निधि से बांटे जा रहे सैनिटाइजर भी इसी उद्योग से खरीदे गए हैं अब यह बनाई गई टनल कूड़े के ढेर में ही जाएंगी क्योंकि सरकार ने इनको बैन कर दिया है
बातचीत में एनएचएम के निदेशक व विशेष सचिव निपुण जिंदल ने पुष्टि करते हुए कहा कि तमाम ऐसी सुरंगों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सार्वजनिक स्थलों पर धुआंरहित तंबाकू के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगा दी गई है। तंबाकू को चबाने के अलावा पान मसाला व सुपारी इत्यादि के सेवन से स्लाइवा बनता है, जो कोरोना के मद्देनजर घातक हो सकता है।












