हम सभी की यही दुआ है कि करोना की महामारी का संकट जल्दी से जल्दी हमारे देश से खत्म हो परंतु जब यह संकट समाप्त होगा उसके बाद अर्थव्यवस्था को जो आकलन लगाए जा रहे हैं उनके अनुसार अगले 1 वर्ष तक भारतीय अर्थव्यवस्था 1% की वृद्धि दर और कुछ अनुमानों के अनुसार –Minus में रह सकती है। ऐसे में अनिंद्र सिंह नॉटी ने सरकार को सुझाव दिये हैं
1. केंद्र सरकार को एक बार फिर से कुछ साल के लिए जीएसटी को खत्म करके पुरानी VAT की व्यवस्था को शुरू कर देना चाहिए अगर ऐसा ना हो सके तो जीएसटी की दरें आधी कर देनी चाहिए।
2. यह कि अर्थव्यवस्था में कमी होगी तो औद्योगिक विकास दर गिरेगा, औद्योगिक उत्पादन में कमी आएगी और जब औद्योगिक उत्पादन में कमी आएगी तो कम माल बनेगा गाड़ी भी कम भरेगी और आवागमन कम होगा, बिजली की मांग भी कम होगी, ऐसे में सड़कों पर दबाव कम होगा तो केंद्र की सरकार को चाहिए कि
जितनी भी बड़ी सड़क परियोजनाएं शुरू होनी थी, कोई नई बिजली प्रोजेक्ट शुरू होने थे या आधारभूत संरचना (Infrastrucure) इन सभी पर काम रोक कर या कम करके इस बजट को अधिक से अधिक उद्योगों को रियायत दें।
3.केंद्र सरकार ने जब से जीएसटी शुरू हुई है अभी तक राज्यों को जीएसटी कंपनसेशन के रूप में पांच लाख करोड़ रुपए का भुगतान करना है उसको अति शीघ्र करना चाहिए ताकि आगे राज्य सरकारें जल्द से जल्द उद्योगों को पिछले 3 साल से बकाया जीएसटी रिफंड कर सकें जिसके कारण पहले ही उद्योग बहुत अधिक परेशानी में थे।
4. सरकार कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में सब्सिडी और टैक्स रियायतों की घोषणा करें और घोषणा जितनी जल्दी हो, उद्योग मानसिक रूप पर महामारी खत्म होने पर अपना ब्लू प्रिंट और लक्ष्य तैयार कर चुके होंगे।
5. सबसे अधिक मंदी नए मकान खरीदने और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में आएगी इसलिए सरकार को चेंज ऑफ लैंड यूज में फीस में माफी कमी करनी होगी और ऐसे प्रोजेक्ट्स पर रियायतें देनी चाहिए ताकि बाजार में पैसे का आदान-प्रदान बढ़े। जमीनों की कीमतें कुछ बढ़ेगी जरूरतमंद किसान उसको बेच पाएंगे, किसानों के पास पैसा आएगा और उस पैसे को वह पुनः मार्केट में खर्च करके अर्थव्यवस्था में तेजी लाएंगे।
6. सबसे जरूरी क्षेत्र कृषि जिसने 2008-09 में भी वैश्विक मंदी के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाया वही इस बार सबसे बड़ा रास्ता बनेगी। अर्थशास्त्री भी कह रहे हैं कि मंदी का इलाज खेतों से होकर निकलेगा।
कृषि क्षेत्र में अधिक से अधिक रियायतें सब्सिडी प्रोत्साहन सरकार को देना चाहिए और देना भी होगा अगर हम अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाना चाहते हैं!वैसे यह नंबर एक का कदम है जो उठाना चाहिए जिसे मैंने पांचवें नंबर पर लिखा है। अगले समय में जो और जितना भी किसानों के लिए किया जाएगा वह कम माना जाए क्योंकि किसानों की वजह से ही आज हिंदुस्तान भुखमरी से तो बचा ही। आज हमारे पास अगले 2 साल के खाद्यान्न भंडारण हैं तो इसका कारण खेतों में काम करने वाला किसान है वैसे भी मशहूर कृषि अर्थशास्त्री डॉक्टर एम एस स्वामीनाथन ने कहा था If agriculture fails everything else will fail. बेहतर होगा डॉक्टर एम एस स्वामीनाथन की बातों को भी अब दोबारा से पढ़ लिख कर गौर और अमल किया जाए।
7. सरकार चाहे तो लग्जरी आइटम्स जैसे कार आदि और महंगी वस्तुएं जिनकी वैसे भी अब कोई बहुत अधिक जरूरत लोग नहीं समझ रहे हैं इन क्षेत्रों पर सरकार चाहे टैक्स बढ़ा भी दे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
8. अर्थव्यवस्था के घरेलू और देसी नुस्खे इजाद करने पड़ेंगे भारतीय नया मॉडल विकसित करना पड़ेगा हमारी आज भी अर्थव्यवस्था के मानक बाकी विकसित और पश्चिमी राष्ट्रों के साथ मेल नहीं खाते।
9. मेक इन इंडिया जो अभी तक प्रभावी और कारगर नहीं रहा अब उसको सही तरीके से धरती पर उतारने का समय है। हमको हर चीज भारत में पैदा करने और बनाने की दिशा में काम शुरू करना चाहिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता को बिल्कुल कम करना होगा यह एक मौका और बहाना भी है सभी विदेशों से की गई संधियों को समाप्त करने का।
10. सभी दवाइयों के उत्पादन के लिए जरूरी साल्ट्स बनाने वाली सार्वजनिक और सरकारी क्षेत्र की कंपनियों को दोबारा पुनर्जीवित करना चाहिए ताकि अगर कभी दोबारा ऐसा वैश्विक संकट हो तो दवाइयों के निर्माण के लिए कच्चे माल को लेकर हम किसी दूसरे देश से आयात पर निर्भर ना रहे। गलती है तब शुरू हुई थी जब चीन से दवाइयों के कच्चे माल के आयात के कामरेड देखते हुए सरकार ने अपनी कंपनी ही बंद करनी शुरू कर दी।
11. सरकार को कोशिश करना चाहिए जितने भी कृषि उत्पाद दूसरे देशों से आते हैं जैसे सेब अब उन पर लगाम लगाएं इसके अलावा और जो भी फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स और बाकी उत्पाद बाहर से आते हैं उनको भी लाने पर नकारात्मक रवैया रखा जाए इनको देश में ही उत्पादन पर जोर दिया जाए और विदेशी कंपनियों के निवेश से बेहतर है कि देसी निवेशकों को भारत में नए क्षेत्रों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन और सहायता दी जाए।
अनिंद्र सिंह नॉटी ने कहा कि वे अर्थशास्त्री तो कतई नहीं हूं लेकिन यह दर्जनों अर्थशास्त्रियों और कृषि विशेषज्ञों के जो लेख इस समय में मैंने पड़े हैं उनका निचोड़ मात्र है।












