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हिमाचल प्रदेश में शिमला नगर निगम (एसएमसी) ने इस महीने से पानी का मूल्य आठ प्रतिशत बढ़ा दिया है, जिससे राजधानी के उपभोक्ताओं को ज्यादा बिल देने पड़ेंगे। इसी तरह, सीवरेज शुल्क भी आठ प्रतिशत बढ़ेगा, क्योंकि यह सीधे पानी की खपत से जुड़ा है। एसएमसी बढ़ते खर्च और महंगाई के साथ तालमेल बिठाने के लिए हर साल पानी के शुल्क में 8-10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शहर में पानी की सप्लाई और सीवरेज सेवा की वित्तीय व्यवहारिकता सुनिश्चित करने के लिए यह बढ़ोतरी ज़रूरी है।
26,000 घरेलू पानी के कनेक्शन नए बदलाव से होंगे प्रभावित
अभी, पानी के बिल के साथ सीवरेज शुल्क भी लिया जाता है। घरेलू उपभोक्ता से कुल पानी के बिल का 30 प्रतिशत सीवरेज शुल्क के तौर पर लिया जाता है। सीवरेज का हिसाब पानी की खपत के आधार पर किया जाता है, इसलिए पानी के शुल्क में कोई भी बढ़ोतरी अपने आप सीवरेज शुल्क में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी कर देती है। शिमला में करीब 26,000 घरेलू पानी के कनेक्शन इस नये बदलाव से प्रभावित होंगे। यह बढ़ोतरी मेयर सुरिंदर चौहान के पेश किये गये सालाना बजट के तहत हुई है, जिसमें बढ़े हुए उपभोक्ता शुल्क को कमाई का एक मुख्य स्रोत बताया गया था।
निगम निकाय का तर्क
निगम निकाय का तर्क है कि अवसंरचनाओं को बनाए रखने और बिना रुकावट आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर बढ़ोतरी ज़रूरी है, जबकि आलोचकों का कहना है कि बार-बार बढ़ोतरी से पहले से ही महंगाई के बोझ तले दबे घरों पर पैसे का बोझ बढ़ रहा है। पहले नगर निगम सीधे पानी के वितरण को प्रबंधित करता था, लेकिन बाद में इसे शिमला जल प्रबंधन निगम को हस्तांतरित कर दिया गया। साथ ही परिचालन में निजी हिस्सेदारी भी शुरू की गयी थी।











