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HPBOSE 2026: अब छात्रों को नहीं करना होगा रिजल्ट का लंबा इंतजार, जानें किस दिन आएगा 10वीं और 12वीं का परिणाम

Khabron wala

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड इस बार बोर्ड परीक्षाओं के इतिहास में एक नया कीर्तिमान रचने की तैयारी में है। छात्र अभी परीक्षा केंद्रों में अपनी मेधा लिख ही रहे हैं, और उधर बोर्ड ने परिणामों की समय सीमा तय कर दी है। इस बार बोर्ड का लक्ष्य केवल परीक्षा कराना नहीं, बल्कि 30 अप्रैल तक नतीजों का पिटारा खोलकर छात्रों का इंतजार खत्म करना है। इस पूरी प्रक्रिया को ‘पारदर्शी’ और ‘स्पीड’ का अनूठा संगम बनाने के लिए बोर्ड ने तकनीक और त्वरित प्रबंधन का सहारा लिया है।

मूल्यांकन का ‘काउंटडाउन’ और शेड्यूल

बोर्ड ने उत्तरपुस्तिकाओं को जांचने के लिए एक सुनियोजित ब्लूप्रिंट तैयार किया है।

17 मार्च से ही लिखित परीक्षाओं के पैकेटों को जमा करने और उन्हें प्रोसेसिंग के लिए खोलने का अभियान छिड़ जाएगा।

अप्रैल की दूसरी तारीख से प्रदेश के 41 विशेष केंद्रों पर शिक्षकों की टीमें कॉपियां जांचने का मोर्चा संभाल लेंगी।

आंकड़ों की जुबानी: कितने छात्र दे रहे हैं परीक्षा?

इस साल शिक्षा की इस महापरीक्षा में पौने दो लाख से अधिक छात्र अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। नियमित परीक्षार्थियों में 10वीं के 93,564 और 12वीं के 81,411 छात्र शामिल हैं। वहीं, ‘ओपन स्कूल’ (SOS) के माध्यम से भी लगभग 10 हजार छात्र (8वीं, 10वीं और 12वीं) अपनी शैक्षणिक योग्यता को नई उड़ान दे रहे हैं।

‘एग्जाम मित्र’ ऐप: नकलचियों और लापरवाही पर डिजिटल स्ट्राइक

बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने इस बार परीक्षाओं को ‘फुलप्रूफ’ बनाने के लिए तकनीक का कड़ा पहरा लगा दिया है। अब परीक्षा केंद्रों की हर हलचल पर मुख्यालय की सीधी नजर है।

अनिवार्य रिपोर्टिंग: केंद्रों पर तैनात अधिकारियों के लिए ‘एग्जाम मित्र’ ऐप पर अपडेट देना अब ऐच्छिक नहीं, बल्कि अनिवार्य कर दिया गया है।

रियल-टाइम निगरानी: परीक्षा के दौरान क्या स्थिति है, इसकी जानकारी पल-पल में ऐप पर अपलोड करनी होगी।

जीरो टॉलरेंस: डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया है कि सूचना देने में किसी भी तरह की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए समन्वयकों को विशेष शक्तियां दी गई हैं ताकि वे डिजिटल डेटा की सत्यता की जांच कर सकें।

बोर्ड का दृष्टिकोण:

अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा के अनुसार, बोर्ड का उद्देश्य केवल परीक्षा लेना नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था कायम करना है जहां छात्र को अपने परिणाम के लिए महीनों भटकना न पड़े और पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष रहे।

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