Khabron wala
नशा तस्करों के खिलाफ शिमला पुलिस का विशेष अभियान रंग ला रहा है। पुलिस अब केवल स्थानीय पैडलर्स (नशा बेचने वालों) को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि बैकवर्ड लिंकेज (नशे के स्रोत) को खंगालते हुए बाहरी राज्यों में बैठे मुख्य सरगनाओं पर भी शिकंजा कस रही है। इसी कड़ी में शिमला पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने ड्रग्स सप्लाई करने वाले दो मुख्य सरगनाओं को उत्तर प्रदेश और पंजाब (भारत-पाक बॉर्डर) से गिरफ्तार किया है।
पहला मामला: लखनऊ से कूरियर के जरिए आ रही थी प्रतिबंधित दवाइयां
रोहड़ू पुलिस थाना में दर्ज एक मामले में पुलिस ने सबसे पहले 190 प्रतिबंधित नाइट्राजेपम टैबलेट्स के साथ दो आरोपियों सिद्धांत खागटा (रोहड़ू) और गौरव कुमार (बिलासपुर) को गिरफ्तार किया था। जब पुलिस ने इनकी व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल और वित्तीय लेनदेन का तकनीकी विश्लेषण किया, तो बड़ा खुलासा हुआ। पता चला कि नशे की यह खेप उत्तर प्रदेश के लखनऊ से कूरियर के जरिए भेजी गई थी। इसके बाद शिमला पुलिस की एक विशेष टीम लखनऊ पहुंची और 17 मई को मुख्य सप्लायर अहमर ब्रिजास (32) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी सज्जादबाग कालोनी, दौलतगंज, लखनऊ का रहने वाला है। जांच में सामने आया कि आरोपी लखनऊ में कैमिस्ट शॉप चलाता है और बिना वैध पर्ची के अवैध दवाइयों की सप्लाई करता था। पुलिस अब इस मामले में एनडीपीएस के साथ-साथ ड्रग्स एंड कॉस्मैटिक्स एक्ट के तहत भी कार्रवाई कर रही है।
दूसरा मामला: भारत-पाक बॉर्डर से जुड़ा चिट्टा नैटवर्क किया ध्वस्त
शिमला के सदर पुलिस थाना में 9 मई को दर्ज एक अन्य मामले में पुलिस ने पंजाब के रहने वाले दो आरोपियों निशान सिंह (फिरोजपुर) और गुरप्रीत सिंह (कपूरथला) को 10.300 ग्राम चिट्टे (हेरोइन) के साथ पकड़ा था। पुलिस ने जब इनसे कड़ाई से पूछताछ की और डिजिटल व वित्तीय साक्ष्यों को खंगाला, तो इस खेप के मुख्य सप्लायर के तार सीधे भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से जुड़े पाए गए। मुख्य सप्लायर की पहचान जिला फिरोजपुर के रहने वाले आकाशदीप उर्फ आकाश (22) के रूप में हुई। इसके बाद 19 मई को शिमला सदर पुलिस ने पंजाब की स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर एक बड़ा साझा ऑपरेशन चलाया और आरोपी आकाशदीप को जिला फाजिलका (पंजाब) के जलालाबाद से धर दबोचा।
कार्रवाई में पिछले साल के मुकाबले 9 गुना का इजाफा : एएसपी
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए एएसपी शिमला अभिषेक ने एक प्रैस वार्ता में बताया कि बैकवर्ड लिंकेज (नशे के स्रोत तक पहुंचने) पर किए जा रहे प्रहार के नतीजे अब साफ नजर आ रहे हैं। उन्होंने आंकड़े सांझा करते हुए बताया कि वर्ष 2026 में अब तक बैकवर्ड लिंकेज के आधार पर 39 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 9 गुना अधिक है। एएसपी ने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि शिमला पुलिस अब मामलों की गहराई तक जाकर जांच कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे के खिलाफ शिमला पुलिस की जीरो टॉलरैंस नीति और यह कठोर कार्रवाई आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।












