पांवटा साहिब : आपसी कलह के चक्कर में कांग्रेस ने गंवाई बनी बनाई नगर परिषद
पांवटा साहिब में कांग्रेस विचारधारा के प्रत्याशियों की जीत के बावजूद आपसी कलह के कारण नगर परिषद बनने से रह गई। दरअसल सिर्फ एक मूर्ख व्यक्ति को इस पूरे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। लोग दलाल कहकर अपने आप को कांग्रेसी नेता कहलाने वाले अवनीत सिंह लांबा को कोस रहे हैं और कह रहे हैं कि 60 लाख रुपए खाने के चक्कर में कांग्रेस की सरकार नहीं बनने दी
फिलहाल भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष की अगवाई में प्रेस वार्ता के दौरान निर्मल कौर को नगर परिषद अध्यक्ष के रूप में और उपाध्यक्ष के रूप में इंद्रजीत सिंह मिक्का को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा इस मौके पर सर्वशक्ति भटनागर, राजरानी, आशादेवी, कुलदीप चौधरी, मयंक चौहान, ममता सैनी ने भारतीय जनता पार्टी नगर परिषद को समर्थन देते हुए प्रेस वार्ता में हिस्सा लिया।
पांवटा साहिब में 4 कांग्रेस के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इसके अलावा तीन अन्य पार्षद जो कि कांग्रेस विचारधारा के थे वह समर्थन देने को पूरी तरह राजी थे। लेकिन एक मूर्ख और इमैच्योर किस्म के नेता ने सारी करी-कराई पर पानी फेर दिया। बताया जा रहा है कि वह कांग्रेस के दो प्रत्याशियों को अपने साथ गुप्त स्थान पर ले गया और उनके फोन बंद करवा दिए। इसके अलावा समर्थन देने वाले प्रत्याशियों के साथ गुंडागर्दी और दादागिरी की गई जिसका नतीजा यह निकला कांग्रेस विचारधारा के प्रत्याशीयों ने भाजपा के साथ जाना बेहतर समझा।
पूर्व विधायक किरणेश जंग और मंडल अध्यक्ष भी रहे दूर…
बता दे की पांवटा साहिब में बेहद आसानी से कांग्रेस की नगर परिषद बनने जा रही थी। लेकिन पूर्व विधायक किरनेश जंग और मंडल अध्यक्ष हरप्रीत सिंह अपने प्रत्याशियों के साथ बिल्कुल भी खड़े नजर नहीं आए। नतीजा यह निकला कि बिना किसी राजनीति के भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नगर परिषद बनाकर कांग्रेस सरकार के मुंह पर तमाचा मार दिया है।









