आसन वेटलैंड बचाने को एसडीओ ने जारी किए कड़े निर्देश , 10 किलोमीटर दायरे में खनन सामग्री के परिवहन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश
आसन संरक्षण रिजर्व (आसन वेटलैंड) के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) में अवैध खनन और खनन सामग्री के परिवहन को लेकर वन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। कालसी वन प्रभाग के एसडीओ राजीव नयन नौटियाल ने विकासनगर, सहसपुर और कालसी थाना प्रभारियों को पत्र जारी कर आसन संरक्षण रिजर्व के 10 किलोमीटर दायरे में खनन सामग्री के परिवहन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
जारी पत्र में कहा गया है कि वन विभाग को जानकारी मिली है कि डकरानी, ढालीपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में खनन, भंडारण और स्टोन क्रशर से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जो प्रचलित पर्यावरणीय नियमों तथा न्यायालय के आदेशों के विपरीत हैं। विशेष रूप से कैलाश रिवर बेड मिनरल्स लिमिटेड एवं उससे संबद्ध इकाइयों द्वारा इको-सेंसिटिव जोन में खनन, भंडारण और परिवहन गतिविधियों में संलिप्तता पाए जाने का उल्लेख किया गया है।
एसडीओ ने पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया है कि ऐसे सभी वाहनों पर तत्काल रोक लगाई जाए जो रेत, पत्थर, आरबीएम अथवा अन्य खनिज सामग्री लेकर डकरानी, ढालीपुर और रिजर्व क्षेत्र के आसपास संचालित हो रहे हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) की आवश्यक अनुमति के बिना इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि संचालित नहीं की जा सकती।
पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के 14 फरवरी 2024 के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि आसन वेटलैंड संरक्षण रिजर्व के 10 किलोमीटर दायरे में बिना आवश्यक स्वीकृति के खनन गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकतीं। आसन वेटलैंड के रामसर साइट होने के कारण इसके संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है।
वन विभाग ने पुलिस अधिकारियों से अवैध खनन एवं परिवहन पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि पूर्व में जारी निर्देशों के बावजूद अवैध खनन और परिवहन की गतिविधियां जारी रहती हैं तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।









