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हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों के परिणाम आने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया है कि पंचायत चुनावों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की बड़ी जीत के बाद सुक्खू सरकार बीडीसी और जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव टालने की कोशिश कर रही है. वहीं, कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने भाजपा पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि बड़ी संख्या में कांग्रेस विचारधारा से जुड़े उम्मीदवार चुनाव जीतकर आए हैं.
‘अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव टालना चाहती है सरकार’
कुल्लू के ढालपुर में आयोजित भाजपा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में हुए पंचायती राज चुनावों में लगभग 70 प्रतिशत भाजपा समर्थित उम्मीदवार विजयी हुए हैं. उन्होंने दावा किया कि जनता ने कांग्रेस सरकार की नीतियों के खिलाफ मतदान किया है और भाजपा के पक्ष में स्पष्ट जनादेश दिया है. जयराम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पहले पंचायत चुनावों को टालना चाहती थी, लेकिन अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद अब बीडीसी और जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनावों की तारीखें आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार को यह अहसास हो चुका है कि वह इन संस्थाओं में अपना नेतृत्व स्थापित नहीं कर पाएगी, इसलिए चुनाव प्रक्रिया में देरी की जा रही है.
शपथ समारोह और एंट्री टैक्स पर भी उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण कार्यक्रम को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा शिमला में बड़े स्तर पर शपथ कार्यक्रम आयोजित करने से प्रदेश पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा. पहले ऐसे कार्यक्रम जिला स्तर पर आयोजित किए जाते थे. जयराम ने बाहरी राज्यों के वाहनों पर लगाए गए एंट्री टैक्स का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि इस फैसले से पर्यटन और व्यापार प्रभावित हो रहा है तथा सरकार को इस नीति की समीक्षा करनी चाहिए.
मंत्री जगत सिंह नेगी का पलटवार
जयराम ठाकुर के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि पंचायत चुनाव किसी राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़े गए थे, इसलिए परिणामों को सीधे भाजपा या कांग्रेस की जीत-हार बताना भ्रामक है. नेगी ने दावा किया कि प्रदेश में करीब 2400 प्रधान और 2600 उपप्रधान कांग्रेस विचारधारा से जुड़े उम्मीदवार विजयी हुए हैं. उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों में स्थानीय मुद्दे, व्यक्तिगत प्रभाव और क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
जगत नेगी ने कहा कि भाजपा चुनाव परिणामों के आधार पर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष पेट्रोल-डीजल की कीमतों और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए पंचायत चुनावों को राजनीतिक रंग दे रहा है. उन्होंने कहा कि पंचायत व्यवस्था सामूहिक निर्णयों पर आधारित होती है और किसी एक व्यक्ति की जीत को किसी दल की सीधी जीत बताना उचित नहीं है. नेगी ने यह भी कहा कि भाजपा को केवल राजनीतिक नारेबाजी करने के बजाय लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए.
परिणामों के बाद बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
पंचायत चुनावों के नतीजों के बाद प्रदेश में राजनीतिक माहौल गरमा गया है. भाजपा जहां इन परिणामों को सरकार के खिलाफ जनमत बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे स्थानीय स्तर की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का परिणाम बता रही है. अब सभी की नजरें बीडीसी, जिला परिषद और अन्य स्थानीय निकायों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पदों के चुनावों पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं.












