Khabron wala
हिमाचल प्रदेश राजधानी शिमला के सुन्नी थाना क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां आबादी देह जमीन को हड़पने के लिए पंचायत रिकॉर्ड में हेराफेरी कर जाली दस्तावेज बनाने का भंडाफोड़ हुआ है। शातिर ने न केवल पंचायत दस्तावेजों से छेड़छाड़ की, बल्कि फर्जी कागजातों को अदालत में असली बताकर पेश करने की हिमाकत भी की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी और जालसाजी की गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार तहसील सुन्नी के गांव जुन्नी कलां और डाकघर जुन्नी के रहने वाले परमानंद पुत्र स्व. सिटू ने सुन्नी पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने अपने ही गांव के निवासी महेशी लाल पुत्र कुंदन लाल पर जालसाजी का बड़ा आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी महेशी लाल ने एक सोची-समझी साजिश के तहत वर्ष 2010 से 2017 के बीच खसरा नंबर 181 में स्थित आबादी देह भूमि को अवैध रूप से अपने नाम ट्रांसफर करवा लिया। आरोप है कि इस मास्टरप्लान को अंजाम देने के लिए आरोपी ने पंचायत के रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ कर जाली दस्तावेज तैयार किए।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी महेशी लाल ने न्यायपालिका की आंखों में भी धूल झोंकने की कोशिश की। जब जमीन को लेकर एक दीवानी (सिविल) मुकद्दमा न्यायालय में चला, तो आरोपी ने बड़ी चालाकी से इन्हीं फर्जी दस्तावेजों को अदालत में असली साक्ष्य के रूप में पेश कर दिया। इस खुलासे के बाद मामले की गंभीरता और अधिक बढ़ गई है।
शिकायतकर्ता परमानंद की तहरीर पर सुन्नी पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया है। पुलिस ने आरोपी महेशी लाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस टीम अब उन सभी पंचायत रिकॉर्ड्स और फाइलों को खंगालने में जुट गई है, जिनके आधार पर जमीन का यह अवैध स्थानांतरण किया गया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस गहराई से होने वाली जांच के बाद पंचायत स्तर पर हुई मिलीभगत की कई और परतें खुलने की उम्मीद है।









