आईआईएम सिरमौर धौलाकुआं की दो पूर्व महिला सुरक्षा गार्ड ने पुलिस में दी शिकायत में आरोप लगाए हैं कि हुकम चन्द प्रशासनिक अधिकारी IIM सिरमौर ने उनका यौन उत्पीड़न वह मानसिक उत्पीड़न किया है वह उनके साथ जातिगत भेदभाव किया है इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है
महिलाओं ने एक शिकायत पत्र पुलिस को दिया था जिसमें कहा गया था कि आईआईएम सिरमौर के प्रशासनिक अधिकारी श्री हुकम चंद एवं अन्य संबंधित अधिकारियों के विरुध्द यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना, रिश्वत मांगने, जातिगत भेदभाव एवं आपराधिक षडयंत्र के संबंध में एफआईआर दर्ज करने हेतु शिकायत।
महोदय, हम अधोहस्ताक्षरी शिकायतकर्ता निम्नलिखित शिकायत प्रस्तुत करती हैः हम आईआईएम सिरमौर, धौलाकुआं, हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्सिंग एजेंसी एम/एस सुंदर भूमि के माध्यम से सुरक्षा गार्ड के रुप मे कार्यरत थी। हमने अपने सेवाकाल को दौरान पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ कार्य किया तथा हमारे विरुध्द कभी कोई शिकायत या अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं हुई। जब हम एम/एस सुंदर भूमि एजेंसी के माध्यम से आईआईएम सिरमौर में कार्यरत थी, उसी दौरान प्रशासनिक अधिकारी श्री हुकम चंद द्वारा हमारे साथ लगातार अशोभनीय व्यवहार, अभद्र टिप्पणियां, मानसिक प्रताड़ना तथा यौन उत्पीड़न की घटनाएं की जाती थी। वह अपने पद का अनुचित लाभ उठाकर हमे असहज एवं भयभीत करने का प्रयास करता था। नौकरी छिन जाने तथा प्रतिशोधात्मक कार्रवाही के भय से हम उस समय किसी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत नहीं कर सकीं और मजबूरीवश चुप रही।
सुरक्षा एजेंसी के परिवर्तन के पश्चात दिनांक 01.01.2026 से हमारी सेवाएं अचानक समाप्त कर दी गई। इसके पश्चात हमने आईआईएम सिरमौर के निदेशक प्रफुल्ला वाई. अग्निहोत्री से भी अपनी समस्या के संबंध में निवेदन किया, परंतु हमारे अनुरोध पर कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई। बाद में हमने आईआईएम सिरमौर के प्रशासनिक अधिकारी श्री हुकम चंद से मुख्य सुरक्षा द्वार पर मिलकर पुनः रोजगार दिए जाने हेतु अनुरोध किया। हमने उन्हे अपनी आर्थिक स्थिति से अवगत कराया तथा यह भी बताया कि शिकायतकर्ता श्रीमती रमा देवी अनुसुचित जाति (SC) वर्ग से संबंधित है।
इस दौरान श्री हुकम चंद ने हमारी मजबूरी का अनुचित लाभ उठाते हुए हम दोनों से नौकरी जारी रखने अथवा पुनः नियुक्ति दिलाने के बदले प्रत्येक से * 25,000/-(पच्चीस हजार रुपये) की मांग की। इतना ही नहीं, उसने हमसे कहा कि यदि हमे नौकरी चाहिए तो हमे उसकी इच्छा अनुसार कार्य करना होगा तथा उसके द्वारा किए जाने वाले किसी अनुचित व्यवहार का विरोध नहीं करना चाहिए।
हुकम चंद ने हमारे चरित्र के संबंध में भी अपमानजनक एवं अश्लील टिप्पणियां की, जिससे हमारी गरिमा एवं सम्मान को गंभीर ठेस पहुंची। उसके व्यवहार एवं कथनों से हमे स्पष्ट रुप से यह महसूस हुआ कि वह हमारी मजबूरी का लाभ उठाकर हमारा यौन शोषण (Sexual Harassment) तथा मानसिक शोषण (Mental Harassment) करना चाहता है।
इसके अतिरिक्त, जब शिकायतकर्ता श्रीमती रमा देवी ने अपने अनुसुचित जाति वर्ग से संबंधित होने की बात कही, तब श्री हुकम चंद ने जातिसुचक एवं अपमानजनक टिप्पणियां करते हुए कहा कि वह इस बात को नहीं मानता तथा इस आधार पर भी हमारे साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया। इससे हमे सामाजिक अपमान एवं मानसिक पीड़ा का सामने करना पड़ा।
हुकम चंद के उक्त कृत्य महिलाओं की गरिमा, सम्मान एवं संवैधानिक अधिकारों के विरुध्द है। उसके द्वारा किया गया आचरण प्रथम दृष्या यौन उत्पीडन, मानसिक प्रताडना, भ्रष्टाचार, पद के दरुपयोग, महिलाओं के शोषण, अनुसुचित जाति के प्रति भेदभाव तथा आपराधिक षडयंत्र की श्रेणी में आता है। उसके कार्यों के कारण हमें गंभीर मानसिक आघात, सामाजिक अपमान एवं आर्थिक क्षति का सामना करना पडा है। अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि उपरोक्त तथ्यों की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कर श्री हुकम चंद तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुध्द भारतीय न्याय संहिता (BNS), महिलाओं के यौन उत्पीडन से संबंधित लागू प्रावधानों, भ्रष्टाचार एवं धमकी से संबंधित प्रावधानों तथा अनुसुचित जाति एवं अनुसुचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की लागू धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि हमें न्याय प्राप्त हो सकें”।









