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केंद्र सरकार द्वारा लाए गए फाइनांस बिल अमैंडमैंट के विरोध में अब पैंशनभोगियों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। बुधवार को शिमला के डीसी कार्यालय के बाहर केंद्र, राज्य सरकार, बैंक और एलआईसी के पैंशनर्स ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान पैंशनर्स ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपने अधिकारों की बहाली की पुरजोर मांग उठाई।
धरना-प्रदर्शन के दौरान ऑल इंडिया ऑडिट एंड अकाऊंट पैंशनर्ज एसोसिएशन के महासचिव जगमोहन ठाकुर ने बताया कि 29 मार्च को संसद में पारित फाइनांस बिल अमैंडमैंट के जरिए पैंशनर्स का भेदभावपूर्ण वर्गीकरण किया गया है। इसके तहत जनवरी 2026 से पहले और बाद में सेवानिवृत्त होने वाले पैंशनर्स को दो अलग-अलग श्रेणियों में बांट दिया गया है। जगमोहन ठाकुर ने स्पष्ट किया कि इस संशोधन का सबसे ज्यादा नुक्सान 2026 से पहले रिटायर होने वाले पैंशनर्स को होगा। नए नियमों के मुताबिक अब उनका पैंशन संशोधन पूरी तरह से रोक दिया जाएगा और उन्हें भविष्य में केवल महंगाई राहत ही दी जाएगी।
महासचिव जगमोहन ठाकुर ने कहा कि पैंशनर अपने हकों के लिए सड़कों से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि केंद्र के इस फैसले के खिलाफ पैंशनर्स की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई है। शीर्ष अदालत ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया है और मामले की सुनवाई 25 अगस्त को तय की गई है।
अपने आंदोलन को तेज करते हुए पैंशनर्स ने आगे की रणनीति भी स्पष्ट कर दी है। बुधवार को देशभर में कॉल अटैंशन-डे मनाया गया, जिसके तहत विभिन्न विभागाध्यक्षों के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा जा रहा है। जगमोहन ठाकुर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो आगामी 17, 18 और 19 सितम्बर को शिमला शहर में केंद्र, राज्य, बैंक और एलआईसी के सभी पैंशनर संयुक्त रूप से 3 दिवसीय महाधरना देंगे। इसके बाद आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाते हुए 25 नवम्बर को देशभर के पैंशनर दिल्ली पहुंचेंगे और मार्च टू पार्लियामैंट (संसद मार्च) करेंगे।










