देर शाम छत्तीसगढ़ पुलिस ने सतपाल सिंह उर्फ सत्ता की निहालगढ़ स्थित आरा मशीन पर छापेमारी की और भारी मात्रा में अवैध खैर की लकड़ी बरामद की है यह लकड़ी झारखंड के जंगलों से चोरी कर हिमाचल तक तस्करी की गई थी और नकली बिलों के द्वारा झारखंड से हिमाचल पहुंचाई गई थी इस सारे खेल में वन विभाग की मिलीभगत सामने आई है बिना हैम्बर के लकड़ी आरा मशीन में पहुंचती थी और आगे भी सप्लाई हो रही थी बताया जा रहा है कि नकली बिलों पर यह सारा खेल खेला जा रहा था वन विभाग के कुछ भ्रष्ट कर्मचारी अधिकारी पैसे लेकर लकड़ी तस्कर से मिली भगत कर इस सारी वारदात को अंजाम दे रहे थे ऐसे में वन विभाग के भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मांग उठ रही है
पुलिस ने लकड़ी और तस्करी में इस्तेमाल किए गए ट्रक को जप्त कर वन विभाग के सुपुर्द कर दिया है आरोपी की आरा मशीन का रिकॉर्ड कंप्यूटर लैपटॉप सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले ली है वही गिरफ्तारी की आशंका के चलते आरोपी घर के पिछले दरवाजे से भाग गया पुलिस ने उसकी तलाश की परंतु अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी मौके से फरार हो गया बताया जा रहा है कि पहले भी आरोपी के खिलाफ खैर तस्करी के मामले हिमाचल और हरियाणा में दर्ज हैं पहले भी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था परंतु पैसे के लालच में आरोपी द्वारा तस्करी के काम में जुट गया
पुलिस के मुताबिक, खैर तस्करी में लिप्त इन लोगों को यहां तक पता होता है कि खैर कहां पर बेची जाती है। इसलिए ही यह लोग अब छत्तीसगढ़ से तस्करी कर रहे हैं। वहां पर इन्हें खैर सस्ती मिलती है। कींकर की बिल्टी पर खैर को लेकर आते हैं। यदि कोई रास्ते में रोककर जांच भी करता है, तो वह खैर को पहचान नहीं पाता।
सतपाल सिंह सत्ता की निहालगढ़ स्थित आरा मशीन से खैर हिमाचल प्रदेश के कालाआंब और मिसरवाला जाना था, क्योंकि हिमाचल के कालाआंब और मिसरवाला में कत्थे की प्राइवेट फैक्ट्री है। कत्थे में खैर का प्रयोग होता है। इसके अलावा खैर का प्रयोग दवाईयां बनाने में भी होता है। वहां पर दवाईयों की काफी फैक्ट्री है। इसलिए यहां पर काफी मात्रा में खैर की खपत होती है।
वन विभाग ने इसे दुर्लभ वृक्ष की श्रेणी में रखा है। इस पेड़ का इस्तेमाल औषधि बनाने से लेकर पान और पान मसाला में इस्तेमाल होने वाले कत्था, चमड़ा उद्योग में इसे चमकाने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल डायरिया, पाइल्स जैसे रोग ठीक करने में होता है। हिमाचल प्रदेश उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़ खैर तस्करी के प्रमुख केंद्र बन रहे हैं। खैर का एक वयस्क पेड़ से 5 से 7 लाख रुपए तक का फायदा होता है।











