Khabron wala
अवैध और अवैज्ञानिक चूना खदान वालिया माईन के मलबे से नष्ट हुए जंगलों, पेयजल स्रोतों और कृषि भूमि के नुकसान के आकलन, मुआवजे तथा खदान पर तत्काल प्रतिबंध लगाने हेतु शिकायत दर्ज की गई है।
संगड़ाह क्षेत्र में संचालित वालिया चूना खदान (Walia Lime Mining) से निकलने वाले मलबे (Debris/Muck) द्वारा पहुँचाई गई भारी तबाही पर गहरा रोष और चिंता व्यक्त की गई । पंचायत प्रधान और भारी संख्या में उपस्थित लोगों द्वारा विस्तृत चर्चा के उपरांत सर्वसम्मति से प्रताप प्रस्ताव जारी किया गया की माइन की जांच हो और उसके द्वारा जंगल और पेयजल को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई करवाई जाए और माइन पर तुरंत रोक लगाई जाए।
वहीं दूसरी और पंचायत द्वारा अवैध और वैधानिक तरीके से हो रही चूना पत्थर की कटाई को लेकर विभागों पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए।
पंचायत में प्रधान और लोगों ने लगा ये यह गंभीर आरोप…
1. *जंगलों की बर्बादीः खदान से बिना किसी वैज्ञानिक प्रबंधन के फेंके जा रहे मलबे के कारण पंचायत क्षेत्र संगड़ाह पावरा, रेड़ली एवं लगनू के बेशकीमती जंगल, औषधीय पौधे और हरे पेड़ पूरी तरह दबकर नष्ट हो चुके हैं, जिससे स्थानीय पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हुई है।
2. पेयजल स्रोतों का विनाशः मलबे के सीधे प्राकृतिक जल स्रोतों (बावड़ियों, चश्मों और नालों) में गिरने के कारण संगड़ाह, पावरा, रेड़ली एवं लगनू के सदियों पुराने पानी के स्रोत पूरी तरह बंद हो गए हैं या उनका पानी दूषित होकर पीने योग्य नहीं रहा है। इससे ग्रामीणों और मवेशियों के समक्ष गंभीर जल-संकट पैदा हो गया है।
3. कृषि भूमि की तबाहीः पहाड़ी से लगातार गिर रहे मलबे ने निचले क्षेत्रों पावरा, रेड़ली एवं लगनू में स्थित ग्रामीणों की कई बीघा उपजाऊ कृषि भूमि को अपनी चपेट में ले लिया है। फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और जमीन बंजर हो गई है, जिससे किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार हुआ है।
ग्राम पंचायत के मुख्य प्रस्ताव एवं मांगेंः
तत्काल रोक और जांचः प्रशासन और खनन विभाग (Mining Department) इस चूना खदान के संचालन पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाए तथा पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की उच्चस्तरीय जांच करे। संयुक्त निरीक्षण (Joint Inspection): राजस्व विभाग (Revenue), वन विभाग (Forest) तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Pollution Control Board) की एक संयुक्त टीम तुरंत मौके का मुआयना कर हुए नुकसान का सटीक सरकारी आकलन करे।
मुआवजा एवं भूमि बहालीः खदान मालिक/कंपनी से प्रभावित किसानों को उनकी नष्ट हुई जमीन और फसलों का उचित मुआवजा व भारी जुर्माना दिलवाया जाए। साथ ही कंपनी अपने खर्चे पर कृषि भूमि और जंगलों से मलबा तुरंत हटाए।
यदि प्रशासन और संबंधित विभागों ने इस गंभीर जनसमस्या पर शीघ्र ही कड़े कदम नहीं उठाए, तो ग्राम पंचायत समस्त ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन तथा कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाने के लिए विवश होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।
वही आपको याद दिला दे की अवैज्ञानिक तरीके से चल रही टेलर धार में एक मन के नीचे तीन लोग दब कर मर गए थे। इसलिए हिमाचल प्रदेश सरकार को तुरंत हस्ताक्षेप करते हुए पहाड़ों में चल रही सभी माइनो का निरीक्षण अपने भु-वैज्ञानिको से करवाना चाहिए। ताकि दोबारा हिमाचल प्रदेश में माइनो पर कोई अपनी जान न गवाएं।












