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भूमि से जुड़ा कोई छोटा सा काम हो या वर्षों से अटका राजस्व मामला, हिमाचल में लोगों को अक्सर तहसील और उप-तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे. कभी इंतकाल अटकता था तो कभी तकसीम और निशानदेही के मामलों में लंबा इंतजार करना पड़ता था. समय के साथ लंबित मामलों का बोझ बढ़ता गया और लोगों का समय व पैसा दोनों खर्च होते रहे. ऐसे में प्रदेश सरकार की ओर से शुरू की गई राजस्व लोक अदालतें अब लंबित मामलों के निपटारे का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आई हैं.
लोक अदालतों के जरिए अब तक प्रदेशभर में करीब 6.81 लाख लंबित राजस्व मामलों का समाधान किया जा चुका है. इनमें 5.44 लाख से अधिक इंतकाल, 47,333 तकसीम और 63 हजार से अधिक निशानदेही के मामले शामिल हैं. इसके अलावा राजस्व अभिलेखों में 26,288 दरूस्ती भी की गई हैं.
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, “सरकार आगे भी सुधारात्मक प्रक्रियाओं को जारी रखते हुए ऐसी व्यवस्थाओं को मजबूत करेगी, जिनसे सरकारी सेवाएं लोगों तक त्वरित, सरल और सुगम तरीके से पहुंच सकें. सरकार का उद्देश्य है कि लोगों को अपने वैध मामलों के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और अनावश्यक समय व धन खर्च न करना पड़े”.
अक्टूबर 2023 से हर महीने लग रही लोक अदालत
लंबित राजस्व मामलों को तेजी से निपटाने के लिए प्रदेश में अक्टूबर 2023 से प्रत्येक माह के अंतिम दो दिनों में तहसील और उप-तहसील मुख्यालयों पर राजस्व लोक अदालतें आयोजित की जा रही हैं. इन अदालतों के माध्यम से लंबित मामलों की सुनवाई कर मौके पर ही निपटारे की प्रक्रिया को गति दी जा रही है. इसका सीधा लाभ उन लोगों को मिल रहा है, जिन्हें छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था.
सरकार ने राजस्व मामलों के निपटारे की रफ्तार और बढ़ाने के लिए जनवरी 2026 से विशेष राजस्व लोक अदालतों की शुरुआत की है. इसके तहत हर सप्ताह मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को तीन दिन विशेष लोक अदालतें लगाई जा रही हैं. इनमें मुख्य रूप से तकसीम और राजस्व दस्तावेजों में सुधार से संबंधित मामलों का समाधान किया जा रहा है. इससे लंबित मामलों की संख्या में कमी आने के साथ लोगों को अपनी जमीन से जुड़े मामलों के समाधान के लिए अधिक प्रभावी मंच मिला है.
गांव-दूरदराज के लोगों को सबसे ज्यादा फायदा
राजस्व लोक अदालतों की यह पहल ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों के लिए विशेष राहत लेकर आई है. पहले भूमि संबंधी मामलों के लिए लोगों को बार-बार राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे. इसमें आने-जाने का खर्च, काम से छुट्टी और समय तीनों का नुकसान होता था. लोक अदालतों के माध्यम से मामलों के त्वरित निपटारे से अब लोगों का समय और धन दोनों बच रहा है. राजस्व अभिलेखों में दरूस्ती और भूमि संबंधी मामलों के समयबद्ध समाधान से प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी मजबूती मिल रही है. बड़ी संख्या में मामलों के निपटारे से लोगों में इस व्यवस्था को लेकर भरोसा बढ़ा है.
दफ्तरों के बार चक्कर नहीं
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुखी प्रशासन उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े मामले सीधे परिवारों और भूमि मालिकों के हितों से जुड़े होते हैं, इसलिए इनका समयबद्ध समाधान सरकार की प्राथमिकता है.











