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वीरभूमि हिमाचल प्रदेश ने देश की सुरक्षा में अपना एक और बहादुर सपूत खो दिया। कांगड़ा जिला के बीएसएफ जवान सरबजीत सिंह का असम में ड्यूटी के दौरान निधन हो गया। जवान के निधन की खबर जैसे ही घर पहुंची परिवार में चीख पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम पसर गया।
सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि जवान सरबजीत सिंह कुछ ही माह बाद रिटायर होने वाले थे और घर में उनकी रिटायरमेंट की तैयारियां चल रही थी। 59 वर्षीय जवान सरबजीत सिंह कांगड़ा जिले के उपमंडल जवाली की ग्राम पंचायत जरपाल के रहने वाले थे। वह बीएसएफ में एएसआई के पद पर तैनात थे और इस समय असम में ड्यूटी देर रहे थे।
रिटायरमेंट की तैयारियों के बीच आई बुरी खबर
सरबजीत सिंह आगामी 30 अप्रैल 2027 को बीएसएफ से सेवानिवृत्त होने वाले थे। परिवार को लंबे समय से उस दिन का इंतजार था, जब देश की सेवा में चार दशक से अधिक समय बिताने के बाद वह वर्दी उतारकर हमेशा के लिए अपने परिवार के बीच लौटेंगे। घर में भी उनकी सेवानिवृत्ति को लेकर तैयारियां चल रही थीं और परिवार भविष्य को लेकर खुशियां संजो रहा था।
लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। गुरुवार को असम से फोन आया कि सरबजीत सिंह की तबीयत अचानक खराब हुई और उनका निधन हो गया। इस खबर ने परिवार की सारी खुशियों को पलभर में गहरे सदमे और मातम में बदल दिया।
1986 में पहनी थी वर्दी
सरबजीत सिंह वर्ष 1986 में सीमा सुरक्षा बल (BSF) में भर्ती हुए थे। इसके बाद उन्होंने अपने जीवन के करीब चार दशक देश की सुरक्षा और सेवा में समर्पित कर दिए। लंबे सैन्य सेवाकाल के दौरान वह असम में तैनात थे। परिवार के अनुसार सरबजीत सिंह अपने कर्तव्य के प्रति हमेशा समर्पित रहे। सेवानिवृत्ति में कुछ ही समय शेष था, लेकिन उससे पहले ही उनका असम में निधन हो गया। उनके जाने से न केवल परिवार ने अपना सदस्य खोया है, बल्कि क्षेत्र ने भी देश की सेवा करने वाले एक बहादुर जवान को खो दिया है।
सरबजीत सिंह के निधन की खबर सुनते ही उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी बीना रानी, पिता प्यारे लाल, तीन बेटे शुभम, साहिल और अक्षय तथा पुत्रवधू राधिका का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार को अब भी यकीन नहीं हो पा रहा कि जिस सरबजीत सिंह के सेवानिवृत्त होकर घर लौटने का इंतजार किया जा रहा था, अब उसी घर में उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर पहुंचेगा। परिवार को सांत्वना देने के लिए रिश्तेदारों, ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों का लगातार घर पहुंचना जारी है।
सरबजीत सिंह के बड़े भाई भगवान सिंह ने बताया कि असम से मिली सूचना के अनुसार जवान का शव शुक्रवार देर शाम अमृतसर पहुंचेगा। इसके बाद शनिवार सुबह करीब 10 बजे पार्थिव शरीर उनके पैतृक घर पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। यह दृश्य पूरे गांव के लिए बेहद भावुक करने वाला होगा। जिस घर की चौखट पर परिवार अपने जवान के सेवानिवृत्त होकर लौटने का इंतजार कर रहा था, उसी चौखट पर अब उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ पहुंचेगा।
हिमाचल प्रदेश को देश की रक्षा के लिए अपने वीर सपूत देने वाली धरती के रूप में जाना जाता है। प्रदेश के हजारों जवान अलग-अलग मोर्चों पर देश की सुरक्षा में तैनात हैं। सरबजीत सिंह भी इसी गौरवशाली परंपरा का हिस्सा थे। उनके निधन से जरपाल पंचायत के साथ-साथ पूरे जवाली क्षेत्र में शोक की लहर है। परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है, वहीं क्षेत्र के लोगों के लिए सरबजीत सिंह की देशसेवा हमेशा गर्व का विषय रहेगी। रिटायरमेंट की खुशियों के सपने आंखों में लिए परिवार जिस दिन का इंतजार कर रहा था, उससे पहले ही घर का सपूत हमेशा के लिए खामोश हो गया। हिमाचल ने देश की सेवा में अपना एक और बहादुर जवान खो दिया।










