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दृढ़ इच्छाशक्ति और सच्ची लगन हो, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। हिमाचल प्रदेश के जिला बिलासपुर के एक छोटे से गांव के रहने वाले विकास गौतम ने इस बात को सच कर दिखाया है। अग्निवीर के रूप में अपने सैन्य करियर की शुरूआत करने वाले विकास अब भारतीय सेना में एक सैन्य अधिकारी बन गए हैं। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने न सिर्फ अपना बचपन का सपना पूरा किया है, बल्कि पूरे प्रदेश का नाम भी रोशन किया है।
बचपन से ही सेना की वर्दी पहनने का सपना देखने वाले विकास गौतम ने कम्प्यूटर साइंस में बीटैक की डिग्री हासिल की है। इसके बाद उन्होंने देश सेवा का मार्ग चुना और अग्निवीर के रूप में भारतीय सेना में शामिल हुए। उन्हें आर्मर्ड कॉर्प्स की प्रतिष्ठित रैजिमैंट द सिंध हॉर्स (14 हॉर्स) में टी-90 टैंक गनर के तौर पर तैनाती मिली। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने लेह में 17,300 फुट की ऊंचाई पर भी देश की सेवा की। इस कठिन तैनाती और रैजिमैंट के कड़े अनुशासन ने उनमें टीमवर्क और जिम्मेदारी की भावना को और गहरा कर दिया, जिसने उनके अंदर एक ऑफिसर बनने की आग को और भड़का दिया।
ओटिए गया में स्थापित किए शानदार कीर्तिमान
सैन्य अधिकारी बनने के लक्ष्य को लेकर विकास ने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी गया का रुख किया। वहां एक सीनियर अंडर ऑफिसर के रूप में इंस्ट्रक्टर्स और सीनियर कैडेट्स के मार्गदर्शन में उन्होंने त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व कौशल को निखारा। प्रशिक्षण के दौरान विकास ने अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। विकास ने क्रॉस-कंट्री दौड़ में अकादमी का शानदार नेतृत्व करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। उत्कृष्ट शारीरिक दक्षता और फिटनेस के लिए उन्हें प्रतिष्ठित पीटी मैरिट कार्ड से सम्मानित किया गया। सेना के सबसे कठिन प्रशिक्षणों में से एक बैटल ऑब्सटेकल कोर्स को उन्होंने मात्र 5 मिनट 51 सैकेंड में पूरा कर अकादमी में एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया।
युवाओं के लिए बने प्रेरणास्त्रोत
सेना के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार विकास गौतम अब एक युवा आर्मी ऑफिसर के रूप में सेना का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सम्मान, साहस और उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ देश सेवा का उनका अटूट संकल्प हिमाचल प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है।









