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हिमाचल हाईकोर्ट में अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू, देश का 10वां हाईकोर्ट बना

Khabron wala 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की औपचारिक शुरुआत हो गई है. इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट देश का 10वां हाईकोर्ट बन गया है, जहां अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग आधिकारिक तौर पर शुरू की गई है. अब तक इस सूची में सर्वोच्च न्यायालय के अलावा 9 उच्च न्यायालय शामिल थे, जिसमें गुजरात, गौहाटी, उड़ीसा, कर्नाटक, झारखंड, पटना, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड और कलकत्ता हाईकोट के नाम शामिल हैं. इसके अलावा कुछ अन्य अदालतों में आंशिक रूप से भी लाइव स्ट्रीमिंग की शुरुआत की गई है. लिहाज़ा देश की 25 उच्च अदालतों में से 13 उच्च अदालतों ने किसी न किसी स्तर पर अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू की है.

हिमाचल हाईकोर्ट में अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग

पहल का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुलभ और जनता के लिए आसान बनाना है. लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से लोग अदालत की कार्यवाही को सीधे देख सकेंगे और उन्हें कार्यवाही से जुड़ी जानकारी के लिए केवल सुनी-सुनाई बातों या चुनिंदा सूचनाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इससे न्यायिक संस्थानों की जवाबदेही और जनता की न्याय व्यवस्था तक पहुंच मजबूत होने की उम्मीद है.

उद्घाटन भाषण के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया ने कहा कि यह केवल तकनीकी सुविधा की शुरुआत नहीं, बल्कि न्याय प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सुलभ और बदलते समाज की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि ‘खुले न्याय’ का सिद्धांत लंबे समय से न्यायिक व्यवस्था का हिस्सा रहा है. पारंपरिक अदालत कक्ष जहां न्यायपालिका और समाज के बीच सेतु का काम करते थे, वहीं लाइव स्ट्रीमिंग इस पहुंच को भौतिक सीमाओं से आगे ले जाती है. हिमाचल जैसे कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी होगी. इससे कानूनी शिक्षा और कानूनी साक्षरता को भी बढ़ावा मिलेगा. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता का अर्थ प्रचार नहीं है और अदालत की गरिमा, गंभीरता और मर्यादा कायम रहनी चाहिए.

निजता और जनहित के बीच संतुलन की जरूरत

न्यायमूर्ति संधावालिया ने निजता और जनहित के बीच संतुलन की आवश्यकता पर भी जोर दिया. विशेष रूप से बच्चों, यौन अपराधों के पीड़ितों और वैवाहिक विवादों जैसे संवेदनशील मामलों में निजता और गरिमा की रक्षा जरूरी होगी. उन्होंने कार्यवाही की अनधिकृत रिकॉर्डिंग, पुनरुत्पादन और दुरुपयोग रोकने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों की जरूरत बताई.

वहीं, कंप्यूटर, ई-कोर्ट और एआई समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने कहा कि यह पहल मुख्य न्यायाधीश, ई-समिति, रजिस्ट्रार और केंद्रीय परियोजना समन्वयक के सहयोग का परिणाम है. उन्होंने कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग और एडवांस्ड हाइब्रिड वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग न्याय व्यवस्था में तकनीक के उपयोग को और मजबूत करेगी. उनके अनुसार, लाइव स्ट्रीमिंग से जनता को अदालत के कामकाज को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिलेगा और न्यायपालिका में विश्वास और मजबूत होगा.

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