IPS अफसर संजीव गांधी पर 24 घंटे में एक और FIR, अब ₹14.07 लाख के घोटाले के आरोप, तबादले के 8 माह बाद भी SP आवास पर कब्जे के आरोप
शिमला के पूर्व एसपी और डीआईजी संजीव गांधी पर 24 घंटे में तीसरी एफआईआर दर्ज हुई है.
उन पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप है, जिसमें उन्होंने बिना स्वीकृति के अपने आवास पर 14.07 लाख रुपये खर्च किए
हिमाचल प्रदेश में शिमला के पूर्व एसपी और डीआईजी संजीव गांधी पर 24 घंटे में तीसरी एफआईआर दर्ज हुई है. अब पुलिस जवानों के आवासों की मरम्मत के लिए मिले सरकारी धन के कथित दुरुपयोग पर तत्कालीन एसपी संजीव गांधी के विरुद्ध केस दर्ज किया गया है. आरोपु है कि बिना स्वीकृति के उन्होंने अपने सरकारी आवास पर ₹14.07 लाख खर्च दर्शाया. रामपुर और शोघी के लिए निर्धारित धनराशि को भी एसपी आवास में खर्च किया गया और ऑडिट में यह बात सामने आई है.
IPS संजीव गांधी पर 24 घंटे में तीसरी FIR, 8 माह बाद भी SP आवास पर जमाया कब्जा
हिमाचल प्रदेश में शिमला के पूर्व एसपी और डीआईजी संजीव गांधी पर 24 घंटे में तीसरी एफआईआर दर्ज हुई है.
शिमला पुलिस ने प्रेस रिलीज में कहा कि डीजीपी दफ्तर की ओर रे गठित ऑडिट समिति की रिपोर्ट में सामने आई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर तत्कालीन एसपी शिमला संजीव गांधी के विरुद्ध पुलिस थाना शिमला में FIR संख्या 139/2026, दिनांक 22.10.2026, धारा 316(5) भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है. इससे पहले, 22 अक्तूबर को दर्ज केस में संजीव गांधी ने कहा था कि वह सच का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे.
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान पुलिस भवनों एवं जवानों के सरकारी आवासों की मरम्मत और रखरखाव के लिए आवंटित लगभग ₹1.28 करोड़ में से ₹14,07,392 तत्कालीन SSP संजीव गांधी के अपने सरकारी आवास ‘साउथवुड’ पर खर्च किए जाने दर्शाए गए, जबकि इस आवास की मरम्मत के लिए न तो सरकार और न ही पुलिस मुख्यालय ने कोई अलग बजट स्वीकृत किया था. संबंधित कार्य मूल प्रस्तावों में भी शामिल नहीं थे तथा सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति और आवश्यक स्वीकृतियों के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं पाए गए.
रामपुर के डीएसपी आवास के लिए स्वीकृत ₹2.80 लाख की धनराशि संबंधित आवास की मरम्मत के बजाय तत्कालीन एसपी के शिमला स्थित सरकारी आवास पर खर्च दर्शाई गई.
शोघी पुलिस बैरियर की गुमटी की मरम्मत के लिए निर्धारित ₹2.50 लाख की राशि भी फरवरी 2023 में काम पूरा होने का हवाला देकर वापस ली गई और तत्कालीन SSP के आवास पर खर्च दर्शाई गई. ऑडिट में शोघी में मरम्मत कार्य पूरा होने के प्रमाण नहीं मिले.
वर्ष 2023-24 में ₹1.62 लाख तथा 2024-25 में ₹7.22 लाख तत्कालीन SSP के आवास पर खर्च दर्शाए गए, जबकि इन कार्यों के लिए आवश्यक पूर्व स्वीकृति एवं जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा के दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए गए.
वर्ष 2025-26 में ₹28.67 लाख के बजट के अंतर्गत प्रस्तावित 50 कार्यों में से 22 कार्य किए जाने का रिकॉर्ड मिला, जिनमें 13 कार्य स्वीकृत मूल प्रस्ताव से बाहर के थे.
शिमला के एसपी गौरव सिंह ने बताया कि शोघी पुलिस पोस्ट आज भी एक कंटेनर में संचालित हो रही है, जहां पुलिस कर्मचारियों को कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करनी पड़ रही है. ऑडिट में संबंधित खर्चों के पर्याप्त जानकारी उपलब्ध ना होने के कारण यह भी जांच का विषय है कि दर्शाई गई धनराशि वास्तव में किन कार्यों पर खर्च हुई और क्या निर्धारित वित्तीय नियमों एवं प्रक्रियाओं का पालन किया गया. ऐसे में एसपी शिमला के संज्ञान में मामला लाए जाने पर, पुलिस मुख्यालय ने इस मामले में केस दर्ज करने के आदेश दिए है.
ऑडिट रिपोर्ट में वर्ष 2025-26 के दौरान 28.67 लाख रुपये के बजट के तहत प्रस्तावित 50 कार्यों का भी उल्लेख किया गया है. इनमें से 22 कार्य किए जाने का रिकॉर्ड मिला, जबकि 13 कार्य स्वीकृत मूल प्रस्ताव से बाहर के बताए गए. समिति ने स्वीकृत प्रस्तावों से अलग कार्यों पर धन खर्च किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं.
अब तक गांधी ने नहीं छोड़ा एसपी आवास
संजीव गांधी का फरवरी 2026 में एसपी शिमला के पद से तबादला हो गया था, लेकिन अब तक उन्होंने एसपी शिमला के लिए निर्धारित सरकारी आवास खाली नहीं किया है. प्रचलित नियमों के अनुसार, पद छोड़ने के बाद इस आवास को अधिकतम एक माह तक ही अपने पास रखा जा सकता है. पूर्व में एसपी शिमला के पद पर रहे सभी अधिकारियों ने पदभार छोड़ने के एक माह के भीतर आवास खाली कर दिया था. ऐसे में तबादले के लगभग आठ महीने बाद भी सरकारी आवास पर एसपी का कब्जा है.
पहले भी दो केस दर्ज किए थे
22 अक्तूबर को दो केस संजीव गांधी पर दर्ज किए गए थे. इसमें कॉन्स्टेबल ने आरोप लगाया था कि उनके साथ 1 लाख 87 हजार रुपये की धोखाधड़ी की गई. कांस्टेबल का आरोप है कि 2024 और 2025 के दौरान सरकारी कार्यों और प्रबंध पूरा करने की जिम्मेदारी उसे दी गई थी और उसने निजी पैसा खर्च किया था. कांस्टेबल ने 1,87,890 रुपये खर्चे किए थे. शिकायतकर्ता का आरोप है कि छह फरवरी, 2026 को संजीव गांधी ने उन्हें बुलाकर भुगतान से संबंधित वाउचर पर धोखे से राशि को निकालकर शिकायतकर्ता को देने के बजाय संबंधित फंड के खाते में डाल दी. साथ ही अलग से दूसरा केस पुलिस थाना सदर बीएनएस की धारा 316 (5) के तहत दर्ज हुई है. इस केस में लोक सेवक या निर्धारित श्रेणी के अन्य लोगों की ओर से आपराधिक विश्वासघात से संबंधित है.









