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अपनी नाक बचाने के लिए जनादेश, लोकतंत्र और संविधान की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं मुख्यमंत्री : जयराम ठाकुर

अपनी नाक बचाने के लिए जनादेश, लोकतंत्र और संविधान की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं मुख्यमंत्री : जयराम ठाकुर

पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव में ही सुक्खू सरकार ने कोर्ट से फ़ज़ीहत में पार कर लिया है दहाई का आंकड़ा

अंकुश इंदोरिया के मामले में तल्ख टिप्पणी के बाद भी सरकार  नहीं छोड़ रही तानाशाही वाला रवैया

शिमला : पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने जिला परिषद शिमला के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में सरकार द्वारा जान-बूझकर देरी के मामले में माननीय न्यायालय द्वारा चुनाव जल्द से जल्द करवाने की तिथि स्पष्ट करने के माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार जनादेश का अपमान करने के साथ संविधान की धज्जियाँ ही नहीं उड़ा रही, बल्कि आए दिन न्यायालय में अपनी फ़ज़ीहत भी करवा रही है। मुख्यमंत्री को समझना चाहिए कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में तानाशाही नहीं चल सकती। सिर्फ़ अपनी नाक बचाने के लिए मुख्यमंत्री न्यायालय, लोकतंत्र, जनादेश, सबका अपमान कर रहे हैं। चुनाव को लेकर जब 11 जनवरी को माननीय न्यायालय ने अपना फ़ैसला दिया था, तो भी मुख्यमंत्री ने न्यायालय पर टिप्पणी की थी। ऐसा मुख्यमंत्री इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि प्रदेश की जनता ने उन्हें ठुकरा दिया है। जिला परिषद के दस में से नौ जिलों में कांग्रेस को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का प्रत्याशी तक नहीं मिला। इतिहास में सत्ताधारी दल की ऐसी हार कभी नहीं हुई थी। इस हार का अंदाज़ा उन्हें पहले था, इसीलिए चुनाव से वह भाग रहे थे, लेकिन न्यायालय के आदेश के सामने उन्हें विवश होना पड़ा। अब उसी हार की खुन्नस निकाल रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चुनाव न करवाने के लिए सरकार ने आपदा प्रबंधन एक्ट लागू कर दिया, लेकिन शर्म की बात है कि सबसे ज़्यादा आपदा प्रभावित क्षेत्र में जाकर अपने तीन साल के कार्यकाल के पूरे होने का जश्न मनाया। केंद्र द्वारा भेजे गए आपदा राहत के पैसों से जश्न हुआ। आपदा प्रभावित लोग और क्षेत्र जिस हालत में थे, उसी हालत में हैं। सड़कें टूटी हैं तो टूटी हैं, मलबा बिखरा है तो बिखरा है। बिजली-पानी का काम अस्थायी ही है। इसके बाद भी सरकार ने पंचायत चुनाव टालने की एक के बाद एक चालें चलीं, लेकिन नीयत में खोट होने की वजह से उच्च न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय तक मुख्यमंत्री की फ़ज़ीहत हुई। अब जिला परिषद और ब्लॉक समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव टालकर भाजपा समर्थित जन प्रतिनिधियों को डरा-धमकाकर उनका समर्थन हासिल करने की कोशिश की जा रही है। प्रदेश की 92 ब्लॉक समितियों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव में भाजपा के 51 अध्यक्ष, 54 उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं, जबकि कांग्रेस के 29 अध्यक्ष तथा 25 उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं। 8 ब्लॉक समितियों के चुनाव अभी तक तय नहीं हुए हैं, क्योंकि कांग्रेस की वहाँ दाल गलने वाली नहीं है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि इंदौरा के मामले में तो उच्च न्यायालय ने तारीख तय की है। इस मामले में हाल ही में माननीय उच्च न्यायालय ने अंकुश इंदोरिया बनाम स्टेट ऑफ़ हिमाचल के (सीडब्ल्यूपी नंबर 11710, 2026) के मामले में स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 79 का वैधानिक आदेश है कि निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाए जाने के तुरंत बाद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव कराया जाए। सरकार ने इसमें सात दिन की समय-सीमा खत्म कर दी, लेकिन मूल अधिनियम की धारा 79 में कोई संशोधन नहीं हुआ। अतः चुनाव को अनिश्चितकाल तक टालने का कोई अधिकार प्रशासन को प्राप्त नहीं हुआ। साथ ही कोर्ट ने पाया कि कार्यपालिका के पास ऐसा कोई वैधानिक अधिकार नहीं है, जिसके आधार पर वह पुलिस जाँच लंबित रहने तक अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव को स्थगित रख सके। न्यायालय ने संबंधित अधिकारी द्वारा चुनाव रोकने को पूर्णतः असमर्थनीय, प्रत्यक्षतः अवैध एवं विधि के शासन के सिद्धांतों के प्रतिकूल मानते हुए तल्ख टिप्पणी की। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस कार्य में अधिनायकवाद की स्पष्ट छाप दिखाई देती है और यह लोकतंत्र की भावना तथा संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल है। इसके बाद भी सरकार तानाशाही से बाज नहीं आ रही है।

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