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रेणुका जी पुलिस थाना इन दिनों गंभीर आंतरिक अव्यवस्था से जूझ रहा है। आरोप है कि थाने में तैनात कुछ स्थानीय पुलिस कर्मचारी ही पुलिस के काम में बाधा बन रहे हैं। ये कर्मचारी थाने से 17 से 22 किलोमीटर की दूरी के रहने वाले बताए जा रहे हैं, जिनमें दूंगी, पार्लर, चांदनी और बिरला क्षेत्र के कर्मचारी शामिल हैं।
स्थानीय होने का फायदा उठाकर इन कर्मचारियों ने क्षेत्र में अपनी गहरी जान-पहचान बना रखी है। इसका सीधा असर पुलिसिंग पर पड़ रहा है।
बाजार में अतिक्रमण और ओवरलोड पर कार्रवाई नहीं
आरोप है कि जान-पहचान के चलते ये कर्मचारी बाजार में दुकानदारों द्वारा सड़कों पर रखे गए सामान को नहीं हटवाते, जिससे आम लोगों को आवाजाही में परेशानी और जाम की स्थिति बनती है। वहीं ओवरलोड वाहनों पर भी आंखें मूंद रखी हैं।
रेत-बजरी के ट्रैक्टरों को क्यों मिल रही छूट – ये है असली वजह
स्थानीय लोगों के अनुसार इस छूट के पीछे निजी कारण है। उप-मंडल मुख्यालय संगड़ाह में निजी निर्माण कार्य चल रहे हैं, जहां के लिए रेत-बजरी से भरे ट्रैक्टर इसी क्षेत्र से जाते हैं।
आरोप है कि दूंगी क्षेत्र का कर्मचारी अपने गांव में चल रहे निजी काम के चलते अपने गांव के ट्रैक्टरों को खुली छूट दे रहा है। इसी तरह रेणुका जी थाने में तैनात अन्य स्थानीय कर्मचारी भी अपने भाईचारे और जान-पहचान के कारण रेत-बजरी के ट्रैक्टरों को बिना किसी जांच के छोड़ देते हैं।
सूत्रों के मुताबिक हरिपुरधार सड़क मार्ग पर रोजाना 30 से 50 रेत-बजरी से भरे ट्रैक्टरों का आना-जाना लगा रहता है, जिन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि ओवरलोड के कारण सड़क हादसों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि ये कर्मचारी खुद को क्षेत्र के स्थानीय विधायक का खास बताकर रसूख दिखाते हैं, जिसके चलते लंबे समय से रेणुका जी थाने से इनका तबादला नहीं हो पाया है। जबकि बाहर से आए कर्मचारी अपना काम ईमानदारी से कर रहे हैं।
इस पूरी मनमानी से पुलिस की छवि धूमिल हो रही है। क्षेत्र के लोगों ने जिला पुलिस अधीक्षक सिरमौर से मांग की है कि मामले का संज्ञान लेकर ऐसे स्थानीय कर्मचारियों का तुरंत अन्य थानों में तबादला किया जाए और रेणुका जी में कानून व्यवस्था को सख्त किया जाए।











