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Himachal: करवाचौथ से पहले पति ने पत्नी को दिया अनमोल उपहार, किडनी देकर बचाई जीवनसाथी की सांसें

Khabron wala

करवाचौथ का पर्व पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का प्रतीक है। इस दिन सुहागिनें अपने पति की सलामती के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और पति भी उन्हें उपहार देकर अपने प्रेम का इजहार करते हैं। लेकिन हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से प्यार, समर्पण और जीवनदान की एक ऐसी भावुक कर देने वाली दास्तान सामने आई है जिसने करवाचौथ के असली अर्थ को साकार कर दिया है। यहां ज्वालामुखी के एक पति ने अपनी बीमार पत्नी को कोई कीमती तोहफा नहीं, बल्कि अपनी ‘किडनी’ दान कर उन्हें जिंदगी की सबसे बड़ी सौगात दी है।

करवाचौथ के मौके पर सामने आई यह कहानी बताती है कि जीवनसाथी के प्रति प्रेम केवल शब्दों, रस्मों और उपहारों तक सीमित नहीं होता, बल्कि मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने और त्याग करने में भी इसकी असली पहचान होती है। ज्वालामुखी के इस दंपती के लिए किडनी ट्रांसप्लांट केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि जिंदगी को दोबारा जीने का अवसर बनकर आया है।

जब जिंदगी बचाने के लिए पति बना पत्नी का सहारा

ज्वालामुखी निवासी 58 वर्षीय महिला ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित थीं। इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं और ऊतकों को नुकसान पहुंचाने लगती है। महिला का टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में उपचार चल रहा था। चिकित्सकों ने किडनी की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन बीमारी के कारण उनकी किडनी ने काम करना बंद कर दिया।

महिला की जान बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचा था। परिवार के सामने यह कठिन समय था, लेकिन पति ने पीछे हटने के बजाय अपनी पत्नी को किडनी देने का फैसला किया। इसके बाद दोनों की जरूरी चिकित्सकीय जांच की गई और विशेषज्ञों की टीम ने ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की। सफल ऑपरेशन के बाद महिला के स्वास्थ्य में सुधार हुआ और दंपती को अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

डॉक्टर बेटी ने समझाया ट्रांसप्लांट का महत्व

इस मुश्किल दौर में दंपती की डॉक्टर बेटी ने भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपने माता-पिता को किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत, प्रक्रिया और उससे जुड़ी चिकित्सकीय बातों के बारे में समझाया। इसके बाद परिवार ने विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श किया और आवश्यक जांचों के बाद ट्रांसप्लांट का निर्णय लिया।

परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं रहा होगा, लेकिन पत्नी को नया जीवन देने के लिए पति का आगे आना इस कहानी को खास बनाता है। जहां करवाचौथ पर पति-पत्नी एक-दूसरे की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करते हैं, वहीं इस दंपती ने मुश्किल परिस्थितियों में अपने रिश्ते की मजबूती को एक अलग ही रूप में सामने रखा है।

टांडा मेडिकल कॉलेज में एक महीने में दो सफल ट्रांसप्लांट

टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में लगातार काम हो रहा है। अस्पताल में अब तक कुल 29 किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। हाल ही में एक महीने के भीतर दो किडनी ट्रांसप्लांट किए गए, जिनमें एक मामले में पति ने पत्नी को और दूसरे मामले में बड़ी बहन ने छोटी बहन को किडनी दान की। विशेषज्ञों के अनुसार इन दोनों मामलों में परिवार के सदस्यों ने अपने प्रियजनों की जान बचाने के लिए अंगदान का फैसला लिया। इससे किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों को नई उम्मीद मिली है।

बड़ी बहन ने छोटी बहन को किडनी देकर बचाई जान

टांडा मेडिकल कॉलेज में सामने आया दूसरा मामला भी रिश्तों की मजबूती और परिवार के समर्पण की मिसाल है। चंबा जिले के चुराह क्षेत्र के लटरूंड गांव की 28 वर्षीय महिला लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रही थीं और डायलिसिस पर थीं। उनकी जान बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट जरूरी हो गया था। ऐसे में उनकी बड़ी बहन ने छोटी बहन को किडनी देने का निर्णय लिया। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने ट्रांसप्लांट किया।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऑपरेशन के बाद दोनों को चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया था। आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार के लिए उपचार का खर्च उठाना भी चुनौती था। ऐसे में चंबा जिले के सामाजिक संगठनों ने मदद की, जिससे ट्रांसप्लांट संभव हो सका। एक ओर बड़ी बहन का त्याग और दूसरी ओर सामाजिक संगठनों का सहयोग इस मामले को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ता है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने निभाई अहम भूमिका

दोनों किडनी ट्रांसप्लांट में टांडा मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों और स्वास्थ्य कर्मियों ने सहयोग किया। किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग से डॉ. अमित शर्मा, डॉ. कुशल कुमार और डॉ. हर्षिका चौधरी ने भूमिका निभाई। नेफ्रोलॉजी विभाग से डॉ. अभिनव राणा, डॉ. दिव्यम के. शर्मा और डॉ. साक्षी कपूर शामिल रहे।

इसके अलावा एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. अनिता शर्मा और डॉ. अमन ठाकुर, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नीरज जम्वाल और पूनम ठाकुर सहित ऑपरेशन थिएटर के तकनीशियनों और नर्सिंग स्टाफ ने सहयोग किया। चिकित्सकीय टीम के समन्वित प्रयासों से इन मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है।

नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अभिनव राणा के अनुसार, इन दोनों मामलों में परिवार के सदस्यों ने अपने प्रियजनों की जान बचाने के लिए किडनी दान की। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के सहयोग और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा के समर्थन का भी उल्लेख किया।

करवाचौथ पर रिश्तों के समर्पण की याद दिलाती कहानी

करवाचौथ का पर्व आने से पहले सामने आई ये दोनों कहानियां रिश्तों के प्रेम, विश्वास और त्याग को एक नया अर्थ देती हैं। ज्वालामुखी के पति ने अपनी पत्नी को किडनी देकर जिंदगी का उपहार दिया, तो चुराह की बड़ी बहन ने अपनी छोटी बहन के लिए अंगदान कर उसे नया जीवन देने की कोशिश की। इन कहानियों का संदेश केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि अंगदान के महत्व से भी जुड़ा है। किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए ट्रांसप्लांट जीवन बदलने वाला विकल्प हो सकता है, हालांकि इसके लिए चिकित्सकीय जांच, विशेषज्ञों की सलाह और उपयुक्त दाता का होना जरूरी है।

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