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सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम के तहत जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जनता के बीच पहुंचे तो एक भावुक कर देने वाला मामले ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं। गाड़ी से उतरते ही मुख्यमंत्री की नजर सड़क किनारे खड़ी दो छोटी-छोटी बच्चियों पर पड़ी। सीएम ने सादगी और प्यार से दोनों बच्चियों को अपने पास बुलाया और उनका हाल-चाल पूछने लगे। मुख्यमंत्री से बात करते-करते अचानक एक छोटी बच्ची वंशिका ठाकुर बिलख-बिलख कर रोने लगी। मासूम को रोता देख मुख्यमंत्री सुक्खू ने तुरंत उसे संभालते हुए बेहद विनम्रता और प्यार से समझाया, बेटा रोते नहीं, बताओ क्या बात है।
जब मुख्यमंत्री ने वंशिका के आंसू पोंछे तो उसने रुंधे गले से अपनी पीड़ा बयां की। वंशिका ने बताया कि उसकी मां नारो देवी जे.बी.टी. शिक्षिका है और पिछले तीन वर्षों से घर से करीब 700 किलोमीटर दूर शिमला के नेरवा में तैनात है। वंशिका अब तक अपनी मां के साथ रहकर ही पढ़ाई कर रही थी, लेकिन नवोदय विद्यालय की परीक्षा की तैयारियों के लिए उसे वापस घर आना पड़ा। मासूम वंशिका ने मुख्यमंत्री से कहा कि मां के बिना दूर रहना उसके लिए बेहद मुश्किल हो रहा है।
चम्बा के सबसे दुर्गम स्कूल में मांगी तैनाती
बच्ची की बात सुनकर वहां मौजूद उसकी मां नारो देवी ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि वह पिछले 3 साल से नेरवा में अपनी सेवाएं दे रही है और तबादला न होने की वजह से उनके बच्चे उनसे दूर रहने को मजबूर हैं। नारो देवी ने मुख्यमंत्री के समक्ष एक ऐसी मिसाल पेश की जिसने सभी का ध्यान खींचा। उन्होंने चुराह क्षेत्र के सबसे दुर्गम स्कूल चंडरू में अपने स्थानांतरण की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि चंडरू स्कूल इतना दुर्गम है कि वहां पिछले 2 सालों से कोई भी स्थायी शिक्षक जाने को तैयार नहीं है। नारो देवी ने कहा मुझे मेरे घर के पास के इस कठिन स्कूल में भेज दीजिए, ताकि मैं बच्चों के पास भी रह सकूं और वहां के बच्चों को शिक्षा भी दे सकूं।
मुख्यमंत्री ने कहा जल्द होगा समाधान
मासूम वंशिका के आंसुओं और उसकी मां की जायज मांग को सुनते ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का दिल पसीज गया। उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपने स्टाफ को तुरंत इस मामले को नोट करने और समस्या के त्वरित समाधान के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने नन्ही वंशिका को दुलारते हुए भरोसा दिलाया कि उसकी मां जल्द ही उसके पास होगी।









