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पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हिमाचल प्रदेश और यूरोपीय देश नॉर्वे अब मिलकर काम करेंगे। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर के साथ एक अहम बैठक की। इस दौरान सीएम ने कहा कि हिमाचल और नॉर्वे के साझा प्रयासों से जो इनोवेटिव मॉडल विकसित होंगे, वे न केवल हिमाचल बल्कि दुनिया के अन्य पर्वतीय क्षेत्रों के लिए भी एक मिसाल बनेंगे।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने नॉर्वे की कंपनियों को हिमाचल प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने विशेष रूप से पर्यटन, हरित ऊर्जा और भू-तापीय ऊर्जा के क्षेत्र में उपलब्ध अपार संभावनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया। सीएम ने कहा कि राज्य सरकार नॉर्वे के संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों और सांझेदारों के साथ मिलकर व्यावहारिक मॉडल विकसित करना चाहती है।
बैठक में तय हुआ कि हिमाचल प्रदेश निर्माण एवं विध्वंस मलबे के प्रबंधन और उसकी रिसाइकलिंग के लिए नॉर्वे की उन्नत तकनीक और बेहतरीन कार्यप्रणालियों का इस्तेमाल करेगा। इसके अलावा बैठक में ठोस कचरा प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी और रिसोर्स रिकवरी, कचरा-मुक्त पर्यटन स्थलों का विकास, जलवायु-अनुकूल शहरी विकास और स्मार्ट सिटी व डिजिटल गवर्नेंस और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे प्रमुख विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
नॉर्वे की राजदूत के सामने मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के विजन को रखते हुए कई अहम जानकारियां सांझा कीं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पर्यावरण बचाने के लिए इलैक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, युवाओं और समाज की भागीदारी से राज्य के हरित आवरण को 29.5 फीसदी से बढ़ाकर 32 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया है। हिमाचल सरकार रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए देश में पहली बार किसानों को मक्की, गेहूं, दूध और कच्ची हल्दी पर न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जा रहा है।
नॉर्वे की राजदूत के साथ हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह, शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, मुख्य सचिव केके पंत, प्रधान सचिव देवेश कुमार और शहरी विकास विभाग के निदेशक नीरज चड्ढा सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।










