केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक हुई . यह बैठक हाइब्रिड मोड में आयोजित हुई है.

6 राज्य के मुख्यमंत्री के इस बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए है. उनके साथ छह राज्यों के मुख्य सचिव और संबंधित अधिकारी, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन सहित गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. बैठक में केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी केंद्रीय जल संसाधन सचिव, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों के भी शामिल हुए.

केंद्रीय गृह मंत्री की पहल के बाद, 16 जून को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के कार्यान्वयन के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हुए थे. आज एमओयू के बाद इस परियोजना को जल्द ही मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा. इससे पहले सुक्खू सरकार ने पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा और हिमाचल के लिए सालाना 1200 से 1800 करोड़ रुपए का इंतजाम किया है.

इस परियोजना से हिमाचल सरकार को सालाना 15 सौ करोड़ रुपए का लाभ होगा. साथ ही दिल्ली, राजस्थान, यूपी, हरियाणा आदि को पानी मिलेगा. यानी देश के बड़े राज्यों का कंठ तर होगा और हिमाचल के खजाने को सुख मिलेगा. मंगलवार को दिल्ली में किशाऊ बांध परियोजना को लेकर एमओयू यानी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिग पर साइन होंगे. हिमाचल के लिए इस अहम दिन पर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू दिल्ली में होंगे. नरेंद्र मोदी सरकार के दो पावरफुल कैबिनेट मंत्रियों की मौजूदगी में देश के लाभान्वित छह राज्यों के सीएम भी इस अवसर पर होंगे. ये सभी एमओयू साइन करेंगे.

सीएम सुक्खू के खाते में ऐसे जुड़ी उपलब्धि
आर्थिक संकट का सामना कर रहे हिमाचल के लिए किशाऊ बांध परियोजना में वित्तीय लागत का घटक एक दिक्कत के रूप में था. सीएम सुखविदर सिंह सुक्खू ने इस मामले में केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी रूप से उठाया. जून महीने में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मीटिंग में हिमाचल सरकार ने स्पष्ट किया कि पावर कंपोनेंट की लागत को वो राज्य वहन करें, जिन्हें पानी का लाभ मिलना है. राज्य सरकार ने तर्क दिया कि हिमाचल को पावर कंपोनेंट की 800 करोड़ की लागत क्यों वहन करनी है, जब देश के छह बड़े राज्यों को पानी मिल रहा है और ये परियोजना हिमाचल की धरती पर हिमाचल की नदी पर बननी है. केंद्र सरकार ने राज्य के इस तर्क को स्वीकार किया.
इस तरह जून महीने में केंद्रीय गृह मंत्री व केंद्रीय उर्जा मंत्री के समक्ष इस बात पर सैद्धांतिक सहमति हुई और हिमाचल पावर कंपोनेंट के 800 करोड़ की लागत के अंशदान से बच गया. यही नहीं, बदले में हिमाचल प्रदेश को सालाना सौ करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी, जो छह सौ करोड़ रुपए के बराबर है. ये गतिरोध आठ साल से चल रहा था, लेकिन अब सारी बाधाएं दूर हो गई हैं. परियोजना के दो घटक यानी कंपोनेंट हैं. एक वाटर कंपोनेंट और एक पावर कंपोनेंट. वाटर कंपोनेंट के तहत देश की राजधानी दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, यूपी, उत्तराखंड आदि लाभान्वित होंगे. इसके बदले वे हिमाचल के हिस्से के पावर कंपोनेंट की लागत को वहन करेंगे. ये लागत 2000 करोड़ रुपए है. अब मंगलवार यानी कल दिल्ली में केंद्रीय उर्जा मंत्री व केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में सीएम सुखविंदर सिंह सहित दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, यूपी, हरियाणा के सीएम आदि मौजूद रहें.
देश के लिए वरदान है ये प्रोजेक्ट
कुल 15 हजार करोड़ रुपए का किशाऊ बांध प्रोजेक्ट दो राज्यों की सीमा हिमाचल व उत्तराखंड में बनेगा. इस परियोजना से 422 मैगावाट बिजली का उत्पादन होगा. किशाऊ बांध परियोजना हिमाचल की टौंस नदी पर बनेगी. ये नदी यमुना नदी की सहायक रिवर है. इस परियोजना से हिमाचल और उत्तराखंड को पचास-पचास फीसदी बिजली उत्पादन का शेयर मिलेगा. पीने के पानी का सबसे बड़ा लाभार्थी हरियाणा राज्य होगा. इस परियोजना के कंप्लीट होने से हरियाणा को 5.71 बिलियन क्यूबिक लीटर पानी प्राप्त होगा. इससे जलसंकट दूर हो जाएगा.
हरियाणा को मिलने वाला पानी कुल परियोजना के पानी का 47.18 प्रतिशत है. पानी का दूसरा बड़ा लाभार्थी उत्तर प्रदेश होगा. यूपी को परियोजना से 3.71 बिलियन क्यूबिक पानी मिलना है. इससे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को पॉइंट 724 बिलियन क्यूबिक पानी का हिस्सा मिलेगा. यदि परियोजना में टोटल वाटर की बात की जाए तो किशाऊ बांध से कुल 1324 मिलियन क्यूबिक लीटर पानी उपलब्ध होगा.
किशाऊ बांध के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये भाखड़ा बांध से भी ऊंचा होगा. बांध की ऊंचाई 236 मीटर के करीब होगी. इसके पानी से 97 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई भी हो सकेगी. इस परियोजना को 18 साल पहले यानी 2008 में राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का दर्जा दिया गया था.
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि आज हिमाचल के इतिहास का एक ऐतिहासिक दिन है। आज हिमाचल के हक की जीत हुई है।
किशाऊ बाँध परियोजना को लेकर पिछले लगभग तीन वर्षों से हमारी सरकार ने हिमाचल के हितों के लिए लगातार संघर्ष किया। हमने साफ कहा कि हिमाचल के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल होगा, तो उसका उचित लाभ भी हिमाचल की जनता को मिलना चाहिए।
आज हुआ समझौता इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार हिमाचल के हितों के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ खड़ी होती है, तो परिणाम भी हिमाचल के पक्ष में आते हैं।अब हिमाचल को बिना कोई निवेश किए हर वर्ष लगभग 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये की आय होगी।
यह सिर्फ एक समझौता नहीं है। यह हिमाचल के संसाधनों पर हिमाचल के अधिकार की जीत है। यह प्रदेश की जनता के हितों की जीत है।हमने राजनीति नहीं, हिमाचल का हक चुना।
हमने बोझ नहीं, हिमाचल के लिए आय का रास्ता चुना।आज की यह ऐतिहासिक उपलब्धि हर हिमाचली की है।समस्त प्रदेशवासियों को इस ऐतिहासिक जीत की हार्दिक बधाई।हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा।












