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मृत बच्चो की शवों के उपर हुई राजनीति पर उठे सवाल मुख्यमंत्री के आने तक बच्चो के शवो को परिजनों को न सोंपने आरोप

Desk by Desk
8 years ago
in मुख्य ख़बरें, हिमाचल प्रदेश
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(अनिल छान्गू )  नूरपुर उपमंडल के मलकवाल में हुई सड़क दुर्घटना मे मृत बच्चो की शवों के उपर हो हुई राजनीति  की बू आ रही है नन्हे बच्चे के पोस्टमार्टम क्या सुबह जल्दी नही हो सकता था    इसे राजनीति अखाड़ा आखिर क्यो बनाया गया । आखिर बच्चो के शवों को देरी से देने के पीछे कैसी सियासत है  आखिर प्रशासन अस्पताल मे एक्स्ट्रा डाक्टर मंगवाकर सुबह जल्दी  पोस्टमार्टम करके शवों को परिजनों को सौंप सकता था । वही अस्पताल के  बाहर स्पीकर लगाने पर भी  सवाल उठ रहे है | जो मृत बच्चो के परिजन सारी  रात अस्पताल के प्रांगण मे बिलख  रहे थे ।  कया  यह सब  मुख्यमंत्री के आने की बजह से यह सब ड्रामा रचा गया ।  जिससे बच्चो के शवों को सुबह देना पड़ा ।

वही विनय शर्मा, एडवोकेट , हिमाचल हाई कोर्ट शिमला व पूर्व डिप्टी एडवोकेट जनरल हिमाचल सरकार ने भाजपा सर्कार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 26 मासूम बच्चों की लाशों पर राजनीतिक रोटियां सेंकने में मुख्यमंत्री तक बाज नहीं आये।लाशों को घर से मंगवाकर मंच पर सजाकर यूँ रखा जैसे कोई प्रदर्शनी हो। श्रधांजलि देने की ऐसी अनूठी परंपरा सिर्फ भाजपा ही शुरू कर सकती थी।

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सोचिये उन माँ बाप पर क्या बीती होगी जो अपने कलेजे के टुकड़ों को छाती से लगाकर ताउम्र न थमने वाला विलाप कर रहे हों और फरमान आ जाए कि बच्चों के शवों को श्रद्धांजलि स्थल के मंच पर ले जाना है।नूरपुर में वाकायदा मंच सजाया गया।माइक ओर लाउडस्पीकर लगाए गए।आठ बच्चों के शवों को पठानकोट से नूरपुर मंगवाया गया ओर जिनके पोस्टमॉर्टम होने के बाद शव परिजनों को सौंपे जा चुके थे उन्हें घरों से मंगवाया गया ताकि राजनीतिक रोटियां सेंकी जा सकें।माननीय मुख्यमंत्री जी क्या आप हर एक बच्चे के घर नहीं जा सकते थे ?

अगर ऐसा नहीं कर सकते थे तो बच्चों के शवों को हेलीकाप्टर से शिमला मंगवा लेते।गरीब परिवार मजबूरी में यह फरमान भी मान लेते।आखिर सरकार हैं आप।लेकिन यह मत सोचिये की ऊपर वाला भी आंखें मूंदकर सोया है।उसकी लाठी में आवाज़ नहीं होती।कल का दिन सच मे घिनोनी राजनीति के माथे पर कालिख पोत गया पर शर्म घास चरने चली गई।संवेदनाएं गंदी नाली में धकेल दी गई।हर आंख जब नम हो,हर दिल जब खून के आंसू रो रहा हो उस वक़्त भी राजनीति अपना स्थान खोज लेती है य बना ही लेती है।भाजपा तो इस काम मे मास्टर है।गुड़िया जैसी बच्ची की दर्दनाक मौत को जो लोग सीढ़ी बनाकर सत्ता तक पहुंचे हों उनके लिए तो यह सब वाएँ हाथ का खेल है।

लेकिन उन परिवारों पर क्या बीती होगी,उस माँ बाप भाई बहन पर क्या बीती होगी जिनके हाथ से छीनकर बच्चों की लाशें मुख्यमंत्री के सामने प्रदर्शनी के रूप में पेश की गई।यह देवभूमि के माथे पर कलंक है मुख्यमंत्री साहब।इससे घिनोनी शर्मनाक ओर घटिया हरकत करने वाले आप दुनियां के पहले राजनेता होंगे जिन्होंने अपनी राजनीति चमकाने के लिए मासूम बच्चों के शवों की प्रदर्शनी लगवा दी।माँ बाप ओर परिजन बच्चों के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे हों और उन्हें फरमान आ जाये चलिए शवों को लेकर नूरपुर।यह सब राम राज्य में ही संभव है।उससे भी शर्मनाक यह कि  पोस्टमॉर्टम तक नहीं किये गए क्योंकि सुबह मुख्यमंत्री ने आना था तब तक शव रोक के रखे जा सकें।सोचिये !! इससे ज्यादा शर्मनाक ओर क्या हो सकता है।शर्मनाक ओर घोर निंदनीय ।

इस सम्बंध मे   नूरपुर के एस. डी. एम . सादिक हुसैन  ने कहा कि ऐसा कुछ नही हुआ है उन्होंने कहा कि ऐसी दर्दनाक सामुहिक घटना तथा परिजनों द्वारा नन्हे बच्चो के शवों की पहचान एवम पोस्टमार्टम के चलते ऐसा हुआ । उन्होंने कहा कि न हि किसी के बच्चे का शव रात को किसी भी परिजन को नही सौंपे थे  उन्होंने कहा कि किसी भी शव को शाम 6 बजे के बाद रात मे पोस्टमार्टम नही किया जा सकता  उन्होने कहा  कि पोस्टमार्टम सुबह 7 बजे शुरू किया था एक एक कर करके जोकि 10 बजे तक मुख्यमन्त्री के आने तक पोस्टमार्टम  चला हुआ था ।

 

 

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