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निजी स्कूलों में बंद नहीं हुआ किताब-वर्दी बेचने का गोरखधंधा, हाई कोर्ट व जिला प्रशासन के आदेशों को नहीं मानते हैं निजी स्कूल, सांठगांठ के चलते कुटी जा रही चांदी ठगे जा रहे हैं अविभावक

( नीना गौतम ) निजी स्कूलों में किताब-वर्दी, कापियां बेचनेका गोरखधंधा बंद नहीं हुआ है। निजी स्कूल हाई कोर्ट व जिला प्रशासन के आदेशों को भी नहीं मानते हैं। सांठगांठ के चलते निजी स्कूल द्वारा चांदी कुटी जा रही है और इस पूरे प्रकरण में ठगे जा रहे हैं तो वह है अविभावक। गत वर्ष निजी स्कूलों में इस गोरखधंधे को बंद करने के लिए तत्कालीन उपायुक्त यूनिस ने कमेटी का गठन किया था तथा कई स्कूलों में छापामारी की थी वहीं स्कूलों को कड़ी हिदायत दी गई थी कि वे इस तरह का व्यवसाय नहीं कर सकते हैं। निजी स्कूल व्यवसाय नहीं कर सकते हैं बल्कि नो लोस नो प्रोफिट पर शिक्षा प्रदान कर सकते हैं।


यही नहीं इसके बाद जिला बुक सेलर एसोसिएशन कुल्लू ने भी इस मामले में कड़ा एतराज जताया था कि निजी स्कूल व्यवसाय कर रहे हैं और स्कूलों में ही किताबें-कापियां व वर्दी भेजी जा रही है। इसके बाद करीब दो माह तक यह विवाद चला था और बाद में जिला प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन व बुक सेलर एसोसिएशन के साथ एक बैठक की थी। इस बैठक में सभी स्कूलों ने कहा था कि वे इस तरह का व्यवसाय नहीं करेंगे और किताबों की सूचियां हर स्कूल जिला प्रशासन, मीडिया, बुक सेलर और आम जनता को सार्वजनिक की जाएगी। लेकिन इस वर्ष फिर से प्रशासन की आंखों में धूलझोंकी गई और स्कूलों ने फिर से अपना व्यवसाय शुरू कर दिया है।


यही नहीं किताबों की सूचियां भी स्कूलों ने जारी नहीं की है। बच्चों पर दवाब बनाया जा रहा है कि उक्त ब्यक्ति से ही किताबें लें। यह खुलासा तब हुआ जब एक स्कूल ने वट्सएप पर एक मैसेज डाला कि प्रिय अविभावकों किताबें अंजुम इंटरप्राइजिज नजदीक रमणीक होटल से ग्रहण करें। इस मैसेज के वायरल होने के बाद बुक सेलर एसोसिएशन ने बैठक की और इस कार्य की कड़े शब्दों में निंदा की है।


बताया जा रहा है कि एक पब्लिशर ने सभी स्कूलों से सांठगांठ कर रखी है। वह किताबों में तीन गुणा रेट लगाता है और अपनी किताबें बेच कर दो गुणा लाभ स्कूल को देता है। इसलिए स्कूल प्रबंधन पहले स्कूल में ही किताबें बेचता था और अब उक्त व्यक्ति से लेने का दवाब बनाते हैं। इस तरह एक अविभावक को असली दाम चार हजार की किताबों के 12 हजार अदा करने पड़ रहे हैं और आठ हजार स्कूल को मिल रहे हैं। बुक सेलर एसोसिएशन भी आरोप लगा चुके हैं कि स्कूल प्रबंधन इस तरह का गोरखधंधा कर रहे हैं और अविभावकों को लुटा जा रहा है। अब देखना है कि निजी स्कूलों के इस गोरखधंधे पर जिलाप्रशासन लगाम कस पाएगा या फिर यह धंधा ऐसे ही फलता फूलता रहेगा।

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